महाराष्ट्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने विधवाओं से हो रहे भेदभाव को खत्म करने की मांग की है। उन्होंने इस मुद्दे पर कानून बनाने की मांग को लेकर देश के मंत्रियों और सांसदों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। महात्मा फुले समाज सेवा मंडल के प्रमुख कार्यकर्ता प्रमोद झिंजड़े ने सरकारी निकायों को पत्र लिखकर सहयोग मांगा है।
झिंजड़े ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया राहतकर और सभी लोकसभा सदस्यों को पत्र भेजकर भारत में ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के माध्यम से विधवाओं से होने वाले भेदभाव को रोकने की मांग की है। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग से अपील की कि वह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को निर्देश दे कि वह सभी राज्य सरकारों से देश भर के गांवों में विधवा प्रथा के उन्मूलन के लिए समितियां गठित करने को कहे।
उन्होंने कहा कि आज भी विधवाओं के साथ गलत व्यवहार किया जाता है। उनका 'मंगलसूत्र', चूड़ियां और बिछिया तोड़ देना, उनकी पायल और रंगीन कपड़े उतार देना, उनके सिर मुंडवा देना और उन्हें सामाजिक कार्यों और पारिवारिक अनुष्ठानों से बाहर कर देना। ये अमानवीय प्रथाएं हमारे समाज के कई हिस्सों में मौजूद हैं।
झिंजड़े ने बताया कि 17 मई 2022 को कोल्हापुर जिले का हेरवाड विधवापन से संबंधित प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपनी ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करने वाला पहला गांव बनने के बाद महाराष्ट्र प्रशासन ने सभी प्रमुख सरकारी अधिकारियों, अफसरों और ग्राम पंचायतों को इस तरह की भेदभावपूर्ण प्रथाओं को खत्म करने और विधवाओं के सम्मान को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है। महाराष्ट्र भर में सात हजार से अधिक ग्राम पंचायतों ने विधवा प्रथा को समाप्त करने और इस तरह के भेदभाव को रोकने के लिए सार्वजनिक रूप से कदम उठाने के लिए ग्राम सभाओं के माध्यम से विशेष समितियों का गठन किया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अन्य केंद्रीय सरकारी निकायों ने इस पहल को स्वीकार किया और पूरे भारत में इस मॉडल को दोहराने की सिफारिश की गई है।
अच्छा मुनाफा कमाने के कारण किसान कर रहे केसर आम की खेती
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में 2022 के बाद से केसर किस्म के आम की खेती का रकबा लगभग पांच गुना बढ़ गया है। अधिकारी ने कहा कि यहां रकबा 2022-23 में 729 हेक्टेयर से 2024-25 में 2,741 हेक्टेयर बढ़कर 3,470 हेक्टेयर हो गया है। उन्होंने कहा कि जालना और बीड जिलों में भी किसान केसर आम की खेती की तरफ बढ़ रहे हैं।
जिला कृषि अधीक्षक अधिकारी प्रकाश देशमुख ने बताया कि अच्छी पैदावार और लाभ के कारण किसान केसर आम की खेती की ओर मुड़ रहे हैं। पौधे 4-5 साल में ही बड़े होकर फल देने लगते हैं। छत्रपति संभाजीनगर को केसर क्लस्टर में शामिल किया गया है। पिछले वर्ष इस क्षेत्र से लगभग 1,500 मीट्रिक टन का निर्यात भी किया गया था।
आम विशेषज्ञ भगवानराव कापसे ने बताया कि अल्ट्रा हाई डेंसिटी प्रौद्योगिकी पद्धति के प्रयोग से प्रति हेक्टेयर 580 से 622 पेड़ लगाए जा रहे हैं। आम के पौधे पहले 33x33 फीट की दूरी पर लगाए जाते थे। अब यह दूरी घटकर 14x5 फीट रह गई है। मैंने 2005 में दक्षिण अफ्रीका में यह तरीका देखा था। अब किसानों को इस उच्च घनत्व वाली विधि से प्रति एकड़ 6-14 टन उपज मिलती है, जबकि महाराष्ट्र में औसत उत्पादकता 3-4 टन के बीच है।