महाराष्ट्र के श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने कहा है कि राज्य सरकार फर्जी मथाडी श्रमिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी और उनके पंजीकरण की प्रक्रिया में डिजिटल सुधार लाएगी। सरकार मथाडी श्रमिकों की पहचान के लिए एक मजबूत सत्यापन तंत्र विकसित कर रही है, ताकि जो लोग असली श्रमिक नहीं हैं, उन्हें बाहर किया जा सके। फुंडकर ने बताया कि इस प्रक्रिया में मथाडी श्रमिक पंजीकरण को आधार, बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली और नियोक्ता सत्यापन से जोड़ा जाएगा। उनका कहना था कि सरकार असली श्रमिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन फर्जी श्रमिकों को सिस्टम का फायदा उठाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बता दें कि यह बयान मथाडी अधिनियम के दुरुपयोग को लेकर उद्योगों के बढ़ते असंतोष के बीच आया है। पिछले महीने, महाराष्ट्र विधानसभा ने मथाडी श्रमिकों के कल्याण के लिए एक नया विधेयक पारित किया, जिससे सिर पर बोझा ढोने वाले श्रमिकों और कुलियों को काम के एक "मुख्य गतिविधि" के रूप में परिभाषित किया गया, ताकि फर्जी श्रमिकों को हटाया जा सके।
राज ठाकरे ने रोका बैंकों में मराठी भाषा के इस्तेमाल का आंदोलन
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने बैंकों में मराठी भाषा में कामकाज के लिए शुरू किए गए आंदोलन को रोक दिया है। उन्होंने कहा, इस मुद्दे पर पर्याप्त जागरूकता फैलाई जा चुकी है। आंदोलन को रोकने में अब कोई बुराई नहीं है। पार्टी कार्यकर्ताओं को लिखे एक पत्र में शनिवार को ठाकरे ने कहा, इस आंदोलन ने यह दिखा दिया है कि स्थानीय भाषा के इस्तेमाल को लेकर आरबीआई के नियमों का पालन न करने के क्या परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा, आंदोलन को फिलहाल रोका जा रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ध्यान हट जाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि वह इस कानून को सख्ती से लागू करे। जहां भी इस कानून का पालन नहीं होता या जहां मराठी मानुष का अपमान होता है, वहां मनसे बातचीत का रास्ता अपनाएगी।