महाराष्ट्र में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान दो करोड़ से अधिक मतदाताओं के गणना फॉर्म जमा नहीं हुए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ये मतदाता या तो अनुपस्थित थे, उनकी मृत्यु हो चुकी थी, वे दूसरी जगह चले गए थे या उनके नाम दोहराए गए थे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने चुनाव अधिकारियों से मुलाकात कर मतदाता सूची से दो करोड़ से अधिक नामों के हटाने पर आपत्ति जताई।
राज्य में एसआईआर का गणना चरण 30 जून से शुरू हुआ था। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 9,78,54,049 मतदाता हैं। इनमें से 7,69,52,262 मतदाताओं यानी 78.64 फीसदी के गणना फॉर्म का डिजिटलीकरण हो चुका है।
महाराष्ट्र में एसआईआर का कितना काम बचा?
वहीं, 2,07,93,916 मतदाताओं यानी 21.25 फीसदी के फॉर्म जमा नहीं हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन मतदाताओं के अनुपस्थित होने, मृत्यु होने, दूसरी जगह चले जाने या नाम दोहराए जाने की वजह सामने आई है। चुनाव अधिकारियों ने बताया कि एसआईआर का डिजिटलीकरण कार्य 99.89 फीसदी पूरा हो चुका है। राज्यभर में 1,00,253 बूथ स्तर के अधिकारी तैनात किए गए हैं।
महाराष्ट्र के 36 में से 14 जिलों में एसआईआर का काम 100 फीसदी पूरा हो चुका है। वहीं, मुंबई के दोनों जिलों में करीब 99 फीसदी काम पूरा हो गया है। एक अधिकारी ने बताया कि डिजिटलीकरण की प्रक्रिया जारी रहेगी और अंतिम आंकड़े सोमवार देर शाम या मंगलवार तक आने की उम्मीद है।
रोहित पवार ने उठाए सवाल
एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने पत्रकारों से बातचीत में सवाल उठाया कि मतदाता सूची के प्रारूप से नाम हटाने का आधार क्या होगा। उन्होंने दावा किया कि जिन मतदाताओं की जानकारी अधूरी है या जिनके नाम में बदलाव हुआ है, उनकी जांच के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है।
पवार ने कहा कि उन्हें पता चला है कि हटाए गए नामों में करीब 34 लाख मतदाताओं को मृत बताया गया है। करीब 76 लाख परिवारों से संपर्क नहीं हो पाया, जबकि 77 लाख मतदाताओं ने अपना स्थायी पता बदल लिया है। उन्होंने दावा किया कि करीब दो लाख लोगों ने जानकारी देने से इनकार कर दिया।
भाजपा पर लगाए क्या आरोप?
पवार ने अधिकारियों के हवाले से कहा कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनमें अनुपस्थित पाए गए मतदाता भी शामिल हैं। ऐसे मतदाता मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म 6 जमा कर सकते हैं। सत्यापन के बाद हटाए गए कुछ नाम दोबारा जोड़े जा सकते हैं।
विधायक ने यह भी दावा किया कि बूथ स्तर के अधिकारियों पर सत्यापन पूरा करने का दबाव था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर "टेबल सर्वे" किए जा रहे थे और कथित तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से जानकारी दी जा रही थी। उन्होंने दावा किया कि पुणे, नासिक और ठाणे में ऐसे मामले सामने आए हैं।
सॉफ्टवेयर से मतदाताओं को वर्गीकृत करने का भी आरोप
पवार ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा की ओर से विकसित एक सॉफ्टवेयर ने मतदाताओं को उसकी विचारधारा से जुड़े, "संदिग्ध" और विरोधी मतदाताओं के रूप में वर्गीकृत किया। उन्होंने कहा कि उन्हें सभी 288 विधानसभा क्षेत्रों का मतदाता सूची का आंकड़ा मिला है और वह इसकी तुलना निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने वाली प्रारंभिक सूची से करेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि मतदाता सूची का प्रारूप संबंधित जिला प्रशासन की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। मतदाता अपना नाम जांच सकेंगे। अगर नाम सूची में नहीं है तो उसे शामिल कराने के लिए फॉर्म 6 जमा किया जा सकेगा।