महाराष्ट्र में बनते नए राजनीतिक समीकरणों में भले ही शिवसेना अपना मुख्यमंत्री बनाने की हसरत पूरी कर ले, लेकिन कई मोर्चे पर उसके हाथ खाली रहेंगे। सूत्रों के मुताबिक, अगर सरकार बनती है तो गृह, कृषि, वित्त जैसे अहम मंत्रालय के अलावा स्पीकर का पद भी कांग्रेस और एनसीपी के पास होगा। पूरे कार्यकाल में शिवसेना को जहां हिंदुत्व के मुद्दे पर रक्षात्मक रुख अपनाना होगा, वहीं हिंदुत्व की सियासत पर अकेले कब्जा करने के लिए भाजपा इससे जुड़े मुद्दों को लगातार हवा देती रहेगी।
नए फार्मूले में शिवसेना को ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी। भाजपा से तीन दशक पुरानी दोस्ती टूटने की वजह भी यही कुर्सी बनी। कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बनाने की स्थिति में शिवसेना की सबसे बड़ी जिद तो पूरी होगी, मगर अन्य मोर्चों पर उसे लगातार कांग्रेस-एनसीपी का दबाव झेलना होगा। राज्यसभा, विधानसभा की सीटों में बंटवारे में भी शिवसेना को घाटा उठाना होगा। क्योंकि इन पदों को तीन दलों में बराबर बांटा जाएगा।