जगजाहिर है कि भाजपा और जजपा का राजनीतिक एजेंडा किसी भी तरह से मेल नहीं खाता है। वक्त का तकाजा कहें या राजनीतिक मजबूरी, जिसके चलते इन दोनों पार्टियों को साथ आना पड़ा। इस चुनाव से पहले भाजपा का वोट बैंक गैर-जाट वोटरों तक सीमित रहा था। हालांकि लोकसभा चुनाव में जाट वोटरों ने भी भाजपा को समर्थन दिया था। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जाटों को खुश करने के लिए उन्हें खूब टिकट बांटे, लेकिन इसके बावजूद वोट नहीं मिल सके। जाटों के वोट जजपा और कांग्रेस के पक्ष में चले गए।
राजनीतिक विश्लेषक एवं शोधार्थी रविंद्र कुमार का कहना है कि भाजपा यह बात अच्छी तरह से जानती है कि उसे मंत्रिमंडल में किन जातियों को कितना प्रतिनिधित्व देना है। यहां पर मनोहर लाल खट्टर बुरी तरह फंस गए हैं। यदि वे जजपा को ठीक ठाक विभाग देते हैं तो वह कल को भाजपा के लिए ही मुसीबत बन सकती है। जजपा नई पार्टी है, उसे अपने पांव जमाने हैं, इसलिए दुष्यंत चौटाला सरकार के हर स्तर पर सांझेदारी चाहेंगे। यह भी संभव है कि जजपा जाट वोट बैंक को ध्यान में रखकर आगे बढ़े।
दूसरी ओर, भाजपा इस बार यह प्रयास करेगी कि उसका पुराना वोट बैंक यानी गैर जाट वोट, वापस आ जाए। यह एक ऐसा चौराहा होगा, जहां पर दोनों पार्टियों की टकराहट हो सकती है। इसके अलावा बिना पार्टी में शामिल हुए यदि निर्दलीय विधायकों को पद दिए जाते हैं तो वह भी भाजपा के लिए परेशानी भरा कदम होगा। एक तरफ दुष्यंत चौटाला खट्टर सरकार पर दबाव बनाए रखेंगे तो दूसरी तरफ निर्दलीय विधायक भी समय समय पर नुकीले पदार्थ की भांति एक चुभन का अहसास भाजपा को दिलाते रहेंगे।
अब जानिये किसे मिल सकता है मंत्री पद
मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सीएम मनोहर लाल ने पाचों निर्दलीय विधायकों और भाजपा विधायकों को डिनर पर बुलाया है। ये वही निर्दलीय विधायक हैं, जो दिनभर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने के लिए चक्कर काटते रहे। निर्दलीय विधायकों में से रणजीत सिंह को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। यह भी तय है कि रणजीत सिंह को मंत्री बनाया जाता है तो महम सीट से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू की नाराजगी भाजपा को झेलनी पड़ सकती है। इतना ही नहीं, कुंडू यह दावा कर रहे हैं कि उनके साथ चार अन्य विधायक भी हैं।
दूसरे निर्दलीय विधायकों में रणधीर गोलन, नयनपाल रावत, सोमवीर सांगवान और धर्मपाल गोंदर शामिल हैं। भाजपा की ओर से अनिल विज, कंवरपाल गुर्जर, महिपाल ढांढा, सीमा त्रिखा, दीपक मंगला, बनवारी लाल और कमल गुप्ता का नाम मंत्रियों की सूची में शामिल हो सकता है। जजपा कोटे से राम कुमार गौतम का नाम सबसे आगे है। उन्होंने वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को हराया था। ईश्वर सिंह का नाम भी चल रहा है। निर्दलीय विधायकों में से बलराज कुंडू और रणजीत सिंह का नाम लिया जा रहा है।