महाराष्ट्र में शिवसेना सांसद संजय राउत ने एक बार फिर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, 'मेरे मन में संदेह है कि 2026 के बाद केंद्र सरकार बचेगी या नहीं? मुझे लगता है कि मोदी अपना कार्यकाल पूरा नहीं करेंगे और एक बार केंद्र सरकार अस्थिर हो गई तो इसका असर महाराष्ट्र पर भी पड़ेगा।'
संजय राउत ने संवाददाताओं से बात करते हुए उन अटकलों को खारिज कर दिया कि नवंबर 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद शिवसेना (यूबीटी) के कुछ नेता पार्टी छोड़ सकते हैं। दरअसल, वे शिवसेना (यूबीटी) के राजापुर के पूर्व विधायक राजन साल्वी के उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़ने की चर्चा पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे।
पिछले साल हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 543 सदस्यीय सदन में 272 के बहुमत के आंकड़े से ऊपर 293 सीटें जीती थीं। हालांकि, पिछले दो कार्यकालों के मुकाबले भाजपा अपने दम पर बहुमत से काफी दूर रह गई। राउत ने दावा किया कि मुझे संदेह है कि केंद्र में सरकार 2026 तक टिक पाएगी या नहीं। मोदी अपना कार्यकाल पूरा नहीं करेंगे और जब ऐसा होगा, तो न केवल महाराष्ट्र में बल्कि अन्य जगहों (राज्यों) में भी बदलाव होंगे।
साल्वी के शिवसेना (यूबीटी) छोड़ने की अटकलों पर राज्यसभा सदस्य ने कहा कि उन्होंने पार्टी नेता से बात की, जिन्होंने कुछ स्थानीय मुद्दों पर निराशा व्यक्त की है। राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे साल्वी के संपर्क में हैं। कई बार के विधायक राजापुर से 2024 के राज्य विधानसभा चुनाव में प्रतिद्वंद्वी शिवसेना नेता किरण सामंत से हार गए थे। शिवसेना (यूबीटी) के कुछ नेताओं के दूसरी पार्टियों में शामिल होने की चर्चा के बारे में पूछे जाने पर राउत ने कहा कि उनकी पार्टी में कोई अशांति नहीं है। यह भी बीत जाएगा। सभी दिन एक जैसे नहीं होते।
महायुति पर पहले ही साध चुके निशाना
इससे पहले शिवसेना नेता पिछले महीने महायुति गठबंधन पर हमला बोला था। संजय राउत ने कहा था कि महायुति गठबंधन में सहयोगी दल केवल सत्ता के लिए साथ हैं। उनमें वैचारिक समानता बिल्कुल भी नहीं है। पहले वे अपनी पार्टी की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान देते हैं और फिर सरकार बनाने के लिए साथ आते हैं।
महाराष्ट्र में महायुति की जीत
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) का प्रदर्शन अच्छा नहीं था। पार्टी 36 सीटों पर चुनाव लड़ी, लेकिन उन्हें केवल 10 पर ही जीत मिली। भाजपा 132 से ज्यादा सीटें जीती। वहीं अगर भाजपा नीत महायुति के घटक दलों की बात करें तो एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 57 और अजित पवार की राकांपा 41 सीटें जीतने में कामयाब रही। महाविकास आघाड़ी (कांग्रेस, शिवसेना-यूबीटी, राकांपा-एसपी) ने सिर्फ 46 सीटें जीतीं।