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महाराष्ट्र: देशमुख के कहने पर सचिन वाजे ने लगाई थी पुलिस सेवा में बहाली की अर्जी, ईडी की पूछताछ में उगला राज

Sat, 05 Feb 2022 10:20 PM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

सचिन वाजे ने ईडी के सामने यह भी कबूल किया कि अनिल देशमुख ने उसे मुंबई के बार और रेस्टोरेंट से 100 करोड़ की वसूली के काम में लगाया था।
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सचिन वाजे - फोटो : PTI
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विस्तार
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रिलायंस समूह के मालिक मुकेश अंबानी के घर के पास मिली विस्फोटक कार और उस कार के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी और बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने बड़ा राज उगला। उसने पूछताछ के दौरान ईडी को बताया कि उसका निलंबन रद्द कर पुनर्बहाली के लिए महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने ही गृह विभाग में आवेदन देने के लिए कहा था। वाजे के इस खुलासे से अनिल देशमुख की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

वाजे ने किए कई बड़े खुलासे

ईडी की पूछताछ में वाजे ने बताया है कि अनिल देशमुख ने बहाली के लिए दो करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन उसने असमर्थता जताई। इसके बाद भी देशमुख ने निलंबन रद्द करने की अपील की एक अर्जी देने को कहा। देशमुख ने उससे कहा था कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार समेत वरिष्ठ अधिकारी नाराज हैं, लेकिन वह उन्हें मनाने की कोशिश करेंगे। इसके बाद मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को सचिन वाजे का निलंबन रद्द करने का आदेश दिया गया और सचिन वाजे की मुंबई के सबसे अहम सीआईयू का प्रमुख बनाया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीआईयू में नियुक्ति के बाद उसे बड़े-बड़े केस दिलवाए गए। इससे मुंबई में वसूली का धंधा शुरू हो गया। अहम बात यह है कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने भी ईडी के सामने इसी तरह की बातें कबूल की हैं।

देशमुख ने वाजे को वसूली में लगाया

सचिन वाजे ने ईडी के सामने यह भी कबूल किया कि अनिल देशमुख ने उसे मुंबई के बार और रेस्टोरेंट से 100 करोड़ की वसूली के काम में लगाया था। इसके बाद वाजे ने दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच देशमुख को उनके पीए कुंदन शिंदे के माध्यम से 4.70 करोड़ रुपये पहुंचाए थे। कुछ दिन पहले यह भी खुलासा हुआ कि ईडी की पूछताछ में ही राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव सीताराम कुंटे ने भी कहा कि अनिल देशमुख उन्हें पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए अनधिकृत सूची देते थे। अनिल देशमुख उस वक्त गृहमंत्री थे। इस लिहाज से वह पद और कद में वरिष्ठ थे, इसलिए वह देशमुख की बातों को मान लेते थे।

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