महाराष्ट्र चुनाव में मतदाताओं ने न सिर्फ सरकार गठन का जनादेश दिया, बल्कि शिवसेना और एनसीपी में असली-नकली की जंग पर भी अपना फैसला सुना दिया। शिवसेना की जंग में एकनाथ शिंदे जहां उद्धव ठाकरे पर भारी पड़े, तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की जंग में भतीजे अजीत पवार ने चाचा शरद पवार को बुरी तरह से पछाड़ दिया। शिंदे और अजीत गुट को शरद व उद्धव गुट के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक सीटें हासिल हुईं।
लोकसभा चुनाव का हिसाब बराबर
विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति ने विपक्षी महा विकास आघाड़ी (एमवीए) से लोकसभा चुनाव का भी हिसाब-किताब बराबर कर लिया है। लोकसभा चुनाव में दोनों गठबंधन को समान रूप से करीब 42 फीसदी वोट मिले थे, मगर आघाड़ी ने महायुति की 17 सीटों के मुकाबले 30 सीटें जीती थीं। विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन को एमवीए के मुकाबले करीब नौ फीसदी अधिक वोट मिले, तो भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले छह गुना अधिक सीटें हासिल हुई हैं।
विरासत की जंग में पीछे छूट गए उद्धव
विरासत की जंग के फाइनल मुकाबले में शिवसेना (यूबीटी) के मुखिया उद्धव शिवसेना शिंदे के मुखिया एकनाथ शिंदे से पिछड़ गए। लोकसभा में महज सात सीटें जीतने वाली शिवसेना (शिंदे) ने विधानसभा की 56 सीटें जीत कर बाला साहब ठाकरे की विरासत पर मजबूत दावा पेश किया है। दूसरी ओर, लोकसभा चुनाव में नौ सीटें जीतने वाली शिवसेना (यूबीटी) विधानसभा में महज 17 सीटें ही जीत पाई। जाहिर तौर पर इस नतीजे के बाद उद्धव के लिए भविष्य में हालात संभालना बेहद मुश्किल हो सकता है।
अजीत का पलड़ा भारी
लोकसभा चुनाव के नतीजे के बाद अजीत पवार के भविष्य पर सवाल उठाए जा रहे थे। दरअसल, तब अजीत सिर्फ एक सीट जीतने के साथ करीब 3 फीसदी वोट ही हासिल कर पाए थे। इसके उलट, शरद की पार्टी 8 सीटें जीतने में कामयाब हुई थी। हालांकि विधानसभा चुनाव के नतीजे ने अजीत का पलड़ा भारी कर दिया। अजीत गुट को शरद गुट के 12 सीटों के मुकाबले 39 सीटों पर जीत हासिल हुई है। अजीत वाली एनसीपी के मत प्रतिशत में भी करीब सात फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जाहिर है नतीजे से शरद पवार की मुश्किलें बढ़ेंगी। भविष्य में उनकी पार्टी के कई और नेता अजीत के खेमे में जा सकते हैं।