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Pune Land Deal Case: पुणे जमीन घोटाले में पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे-पत्नी पर कोर्ट सख्त, गैर-जमानती वारंट जारी

Fri, 06 Feb 2026 09:51 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

पुणे जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे और उनकी पत्नी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है।
 
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एकनाथ खडसे - फोटो : ANI
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विस्तार
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महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ा एक अहम मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पुणे के भूमि सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में मुंबई की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को पूर्व राज्य मंत्री एकनाथ खडसे और उनकी पत्नी मांडकिनी खडसे के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। अदालत ने यह कार्रवाई आरोप तय करने की सुनवाई में दोनों की गैरहाजिरी के चलते की।

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छूट की अर्जी को बताया अस्पष्ट
विशेष सांसद-विधायक अदालत के जज महेश जाधव ने कहा कि खडसे दंपती की ओर से पेश की गई उपस्थिति से छूट की अर्जी अस्पष्ट थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आवेदन में यह नहीं बताया गया कि आरोपी किन व्यक्तिगत कारणों से कोर्ट में उपस्थित नहीं हो सके। साथ ही, इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किया गया।

अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपियों को पूरी जानकारी थी कि इस तारीख को आरोप तय किए जाने थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए जज ने कहा कि सांसद-विधायक मामलों में तेजी से सुनवाई जरूरी है, लेकिन इसके बावजूद आरोपी बिना किसी ठोस वजह के अनुपस्थित रहे। इसके बाद अदालत ने छूट की अर्जी खारिज करते हुए खडसे और उनकी पत्नी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी। इसी तरह का वारंट उनके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के मामले में भी जारी किया गया है।
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मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू
यह मामला तब सामने आया था जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पुणे एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। एजेंसी का आरोप है कि वर्ष 2016 में तत्कालीन राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पुणे के भोसरी इलाके में स्थित करीब तीन एकड़ जमीन अपनी पत्नी मांडकिनी खडसे और दामाद गिरीश चौधरी के नाम खरीदने में मदद की। अदालत ने दिसंबर 2024 में खडसे परिवार की डिस्चार्ज याचिका खारिज करते हुए कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया यह सामने आता है कि संपत्ति ऐसे तरीकों से हासिल की गई, जिन्हें कानून की मंजूरी नहीं थी। अदालत ने यह भी कहा कि बिक्री समझौते और आरोपियों की भूमिका से उनकी मंशा साफ झलकती है।

गौरतलब है कि एकनाथ खडसे 2014 में सत्ता में आई भाजपा सरकार में वरिष्ठ मंत्री थे, लेकिन 2016 में इन आरोपों के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। आरोप है कि जिस जमीन की बाजार कीमत करीब 31 करोड़ रुपये थी, उसे खडसे परिवार ने महज 3.75 करोड़ रुपये में खरीदा।
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