अंबरनाथ नगर परिषद चुनावों के बाद बने गठबंधनों पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पाला बदलने वाले नेताओं पर तंज कसते हुए कलेक्टर के आदेशों को अस्थायी रूप से रोक दिया। सभी दलों को सुनवाई का निर्देश दिया गया है। नए आदेश तक स्थिति यथावत रहेगी। आइए जानते हैं ये पूरा मामला क्या हैं।
अंबरनाथ नगर परिषद चुनावों के बाद बनी राजनीतिक उलझन पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पाला बदलने वाले नेताओं को लेकर तीखा तंज कसा है। अदालत ने गठबंधनों को मान्यता देने और वापस लेने से जुड़े ठाणे कलेक्टर के आदेशों को फिलहाल प्रभाव में आने से रोक दिया है। साथ ही पूरे विवाद पर सभी पक्षों को सुनकर नया आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं।
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हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह बार-बार पक्ष बदलना नगर निकायों में स्थिरता को नुकसान पहुंचाता है। अदालत ने मामले को कलेक्टर के पास लौटाते हुए स्पष्ट किया कि भाजपा, कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना—सभी पक्षों को सुनवाई का पूरा मौका दिया जाए और फिर नियमों के अनुसार फैसला हो।
क्या है पूरा मामला?
20 दिसंबर को हुए नगर परिषद चुनावों के बाद स्थानीय स्तर पर भाजपा और कांग्रेस ने मिलकर अंबरनाथ विकास आघाड़ी (एवीए) बनाई। इसमें राज्य सरकार की सहयोगी अजित पवार गुट वाली एनसीपी भी शामिल रही। इस गठबंधन ने सत्ता हासिल की, जबकि शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी बाहर रह गई।
सीटों का गणित और विवाद
चुनाव में शिवसेना को 27 सीटें मिलीं और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
भाजपा को 14 सीटें और कांग्रेस को 12 सीटें हासिल हुईं।
एनसीपी को चार सीटें मिलीं, जबकि दो सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं।
प्रत्यक्ष चुनाव के जरिए परिषद अध्यक्ष पद भाजपा ने जीता।
सात जनवरी को कलेक्टर ने एवीए को प्री-पोल अलायंस के रूप में मान्यता दी।
पाला बदलने से बढ़ी हलचल
एवीए पर विवाद बढ़ा तो कांग्रेस ने अपने 12 निर्वाचित सदस्यों को निलंबित कर दिया, जिसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद एनसीपी के चार सदस्य शिवसेना के साथ चले गए। 9 जनवरी को कलेक्टर ने इस नए गठजोड़ को प्री-पोल अलायंस मानते हुए एवीए की मान्यता रद्द कर दी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए एवीए हाईकोर्ट पहुंची।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे ने टिप्पणी की कि ये चार सदस्य कल किसी के साथ थे, आज किसी और के साथ हैं। यह ग्लोब-ट्रॉटिंग जैसा है। अदालत ने कहा कि यदि कल फिर कोई और पक्ष चुन लिया जाए तो व्यवस्था कैसे चलेगी। कोर्ट ने सात और नौ जनवरी वाले दोनों आदेशों को फिलहाल स्थगित रखा है।