विनायक राउत का कहना है कि मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत करने के लिए ऐसे ही सिफारिश नहीं की है। राउत का कहना है कि इससे पहले तमाम लोग राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए गए हैं। तमाम लोगों की प्रोफाइल देख लीजिए। कहीं भी उद्धव ठाकरे की प्रोफाइल हल्की नहीं मिलेगी।
उनका प्रोफेशनल कॅरियर शानदार रहा है। राउत ने कहा कि मुझे विश्वास है कि महाराष्ट्र के राज्यपाल उनके एमएलसी मनोनयन की सिफारिश को अपनी मंजूरी दे देंगे। विशेष श्रेणी से एमएलसी का मनोनयन करने के लिए कितने समय का कार्यकाल बचा है, इसका कोई अर्थ नहीं है।
भाजपा के नेताओं का कहना है कि नियम के मुताबिक उद्धव ठाकरे के पास तीन रास्ते थे। वह या तो विधानसभा का चुनाव लड़कर सदन के सदस्य बनते या फिर विधान परिषद में चुनकर आते। तीसरा रास्ता यह है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वी राज चौव्हाण की तरह पद से इस्तीफा देकर और दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते।
चंद्रकांत पाटिल का कहना है कि उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों और वैधानिक परंपरा के अनुसार भी उद्धव ठाकरे (राजनीतिक व्यक्तित्व) का एमएलसी के तौर पर विशेष श्रेणी में मनोनयन नहीं किया जा सकता।
उद्धव ठाकरे के मनोनयन को लेकर कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पास विकल्प है। वह कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के सहयोग से बनी सरकार के मुख्यमंत्री हैं और रहेंगे। राज्यपाल का निर्णय आ जाने दीजिए। हमें भरोसा है कि उद्धव राज्यपाल द्वारा एमएलसी मनोनीत हो जाएंगे। न होने पर अन्य विकल्प का प्रयोग किया जाएगा।