रामलला का दर्शन कर पत्नी संग वापस लौटते उद्घव ठाकरे
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। अभी तक शिव सेना की ओर से पहली बार विधायक बने आदित्य ठाकरे का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए चल रहा था। मगर अब अचानक से उद्धव ठाकरे का नाम चर्चा मे है।
हालांकि चुनावों से पहले ही शिव सेना ने आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री के तौर पर प्रस्तुत करना शुरू कर दिया था। पार्टी कार्यकर्ताओं ने आदित्य के समर्थन में पोस्टर भी लगाए गए थे। इसी लक्ष्य के साथ पहली बार ठाकरे परिवार से कोई चुनाव मैदान में उतरा था।
माना जा रहा है कि एनसीपी और कांग्रेस शिव सेना को समर्थन देने के लिए तैयार है। मगर एनसीपी प्रमुख शरद पवार आदित्य की जगह किसी अनुभवी नेता को मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहते हैं। पवार ने साफ कह दिया कि आदित्य के नाम पर एनसीपी समर्थन नहीं कर सकती। अगर शिवसेना उद्धव ठाकरे का नाम सामने लाए तो समर्थन पर विचार किया जा सकता है। ऐसे में पार्टी ने रणनीति बदलते हुए युवा जोश को जगह अनुभव को तरजीह दी।
मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए शिव सेना ने भाजपा के साथ लंबा गतिरोध झेला। यहां तक कि 25 साल पुरानी दोस्ती को भी ताक पर रख दिया गया, लेकिन पार्टी ने स्पष्ट कर दिया कि वे इस बार कदम पीछे करने के लिए तैयार नहीं हैं। पार्टी लगातार 50-50 के फॉर्मूले पर अड़ी रही। मतलब ढाई साल भाजपा के सीएम और ढाई साल शिव सेना के मुख्यमंत्री। इसका नतीजा भाजपा को सरकार बनाने के दावे से हाथ पीछे खींचने पड़े।
शिवसेना ने गत 31 अक्तूबर को विधायक दल की बैठक में भी संकेत दिए थे कि पार्टी आदित्य के नाम पर नहीं अड़ेगी। पार्टी विधायकों ने आदित्य की जगह एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुना था।