महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के दल- NCP के कद्दावर नेता और कथित तौर पर मंत्री न बनाए जाने से असंतुष्ट छगन भुजबल उनके चाचा शरद पवार के साथ मंच साझा कर सकते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को पुणे में एक समारोह के दौरान भुजबल पवार के साथ दिख सकते हैं। खबरों के मुताबिक भुजबल इसलिए खफा हैं क्योंकि राज्य की सियासत में उनके कद की अनदेखी की गई और देवेंद्र फडणवीस की सरकार में उन्हें कोई मंत्री पद नहीं मिला।
खबरों के मुताबिक असंतुष्ट नेता छगन भुजबल सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर पुणे में एक समारोह में एनसीपी (सपा) प्रमुख शरद पवार के साथ मंच साझा करेंगे। बीते 15 दिसंबर को फडणवीस के शपथ ग्रहण के बाद भुजबल ने अजित पवार पर निशाना साधा था। उन्होंने मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने पर कहा था कि फडणवीस एनसीपी कोटे से उन्हें अपने मंत्रिमंडल में रखना चाहते थे, इसके बावजूद उन्हें कोई पद नहीं मिला।
जानबूझकर कुछ समय के लिए राजनीति से ब्रेक लिया
हालांकि, गुरुवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने यह भी कहा कि वे किसी और को मंत्रिमंडल से हटाने के बाद मंत्री पद नहीं चाहते हैं। विपक्षी नेता कांग्रेस के विजय वाडेट्टीवार और राकांपा (सपा) के जितेंद्र आव्हाड ने दावा किया था कि भुजबल को उनकी पार्टी के सहयोगी धनंजय मुंडे को हटाकर देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल किया जाएगा। विदेश यात्रा से वापस लौटे भजबल ने कहा, मैंने जानबूझकर कुछ समय के लिए राजनीति से ब्रेक लिया। मैं 1967 से राजनीति में सक्रिय हूं, लेकिन कभी-कभी राजनीतिक दिमाग को आराम की जरूरत होती है। भुजबल ने यह भी स्पष्ट किया कि सीएम फडणवीस ने उन्हें मंत्री पद देने का वादा नहीं किया था। उन्होंने कहा, फडणवीस ने केवल इतना कहा था कि चलो सात से आठ दिन प्रतीक्षा करते हैं और इस पर चर्चा करते हैं। बकौल भुजबल, वाडेट्टीवार या जितेंद्र आव्हाड ने जो कहा है, उसके बारे में मैं क्या कह सकता हूं? मैं किसी और को हटाकर पद नहीं चाहता हूं। उन्होंने कहा कि उनका ध्यान सामाजिक कार्यों पर था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक पुणे के चाकन में आयोजित कार्यक्रम में भुजबल-पवार के अलावा अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के दिलीप वाल्से पाटिल सहित कई अन्य नेताओं के शामिल होने की भी उम्मीद है। भुजबल इस कार्यक्रम में फुले की एक प्रतिमा का अनावरण करने वाले हैं।
दरअसल, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वयोवृद्ध राजनेता शरद पवार की पार्टी दो फाड़ हो चुकी है। भतीजे अजित पवार की बगावत के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दो गुटों में बंटी जिसे निर्वाचन आयोग ने भी दो दलों के रूप में मान्यता दी। शरद पवार के हिस्से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) आई, जबकि विधायकों के समर्थन के कारण अजित पवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी मिली। कभी छगन भुजबल शरद पवार के करीबी रहे, लेकिन पार्टी के दो गुटों में बंटने के बाद उन्होंने अजित का दामन थाम लिया।
अजित खेमे में जाने के कारण भुजबल सुर्खियों में रहे, लेकिन विधानसभा चुनाव 2024 के बाद मंत्री न बनाए जाने के कारण उनका असंतोष भी महाराष्ट्र की सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बना रहा। अब सावित्रीबाई फुले की जयंती पर दोनों कद्दावर नेताओं- शरद पवार और भुजबल के एक मंच पर आने की घटना पर सबकी नजरें टिकी हैं।