रायगड में संरक्षक मंत्री पद को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच शिवसेना विधायक महेंद्र थोरवे ने एनसीपी सांसद सुनील तटकरे को मुग़ल बादशाह औरंगजेब के समान बताया। रायगड जिले के इस पद के लिए दोनों दलों के बीच प्रतिस्पर्धा थी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पद पर निर्णय रोक दिया क्योंकि इसे गलत माना गया था।
शिवसेना के विधायक महेंद्र थोरवे ने हाल ही में एक बयान में एनसीपी के सांसद सुनील तटकरे को मुग़ल बादशाह औरंगजेब के समान बताया। उनका यह बयान महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन में बढ़ रही दरार को लेकर था, खासकर रायगड जिले के संरक्षक मंत्री के पद को लेकर।
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बता दें कि रायगड जिले के लिए दो दलों शिवसेना और एनसीपी के बीच यह पद तय करने को लेकर विवाद चल रहा था। बुधवार को अलीबाग में एक कार्यक्रम में बोलते हुए महेंद्र थोरवे ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रायगड के संरक्षक मंत्री के पद पर निर्णय रोक दिया था क्योंकि वह निर्णय गलत था।
महेंद्र थोरवे का कटाक्ष
महेंद्र थोरवे ने कहा कि सुनील तटकरे केंद्र में जा सकते हैं क्योंकि आपके सहयोगियों ने आपको कप्तान बना दिया था। आपको यह समझना चाहिए कि छावा फिल्म में औरंगजेब का स्थान अकलुज (सोलापुर जिले में) दिखाया गया था और आज का औरंगजेब सुतारवाड़ी में रहता है। यह टिप्पणी तटकरे के सुतारवाड़ी से होने को लेकर थी।
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थोरवे ने यह भी कहा कि अगर तटकरे ने शिवसेना के साथ "गलत राजनीति" करना जारी रखा, तो उनकी पार्टी अगली बार रायगड लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि हम आपको यह दिखा सकते हैं कि आप केवल हमारे विधायकों की वजह से ही रायगड के सांसद बने हैं, अन्यथा आप ग्राम पंचायत सदस्य भी नहीं बन सकते।
साथ ही थोरवे ने यह स्पष्ट किया कि जब तक भरत गोगावाले को रायगड का संरक्षक मंत्री नहीं बनाया जाएगा, शिवसेना इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। इस तरह से शिवसेना और एनसीपी के बीच रायगड के संरक्षक मंत्री पद को लेकर विवाद और भी गहरा सकता है।
क्या है विवाद का कारण, एक नजर
गौरतलब है कि एनसीपी और शिवसेना दोनों ही इस पद के लिए दावा कर रहे थे। अंततः सीएम फडणवीस ने एनसीपी की नेता और महिला व बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे को रायगड का संरक्षक मंत्री नियुक्त किया। लेकिन यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। रायगड जिले के महाड क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले रोजगार गारंटी मंत्री भरत गोगावाले भी इस पद के लिए इच्छुक थे। शिवसेना को यह बात पसंद नहीं आई, और जब पार्टी ने इसका विरोध किया, तो मुख्यमंत्री ने इस फैसले पर रोक लगा दी।