एनसीपी विधायकों का कहना है कि वह शरद पवार के साथ हैं
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फडणवीस बहुमत सिद्ध नहीं कर पाएंगे
उन्होंने कहा, 'अजित पवार का फैसला पार्टी लाइन के खिलाफ है और अनुशासनहीनता है। एनसीपी का कोई भी नेता या कार्यकर्ता एनसीपी-भाजपा सरकार के पक्ष में नहीं है। भाजपा को समर्थन देने का फैसला अजित का है। जितने भी विधायक जा रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि एक दलबदल विरोधी कानून है और उनकी विधानसभा सदस्यता खोने की संभावना ज्यादा है। प्रक्रिया के अनुसार अजित पवार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फडणवीस बहुमत सिद्ध नहीं कर पाएंगे। हम सरकार बना सकते हैं।'
एनसीपी अध्यक्ष ने कहा, 'पार्टियों के पास सभी विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित विधायकों की सूची थी। एनसीपी की एक ऐसी ही सूची अजित पवार के पास थी क्योंकि वह एनसीपी के विधायक दल के नेता थे। मुझे लगता है कि उन्होंने यही सूची प्रस्तुत की है। मुझे इस पर यकीन नहीं है लेकिन मुझे संदेह है कि ऐसा हो सकता है। हम इसपर राज्यपाल से चर्चा करेंगे। मुझे नहीं पता कि उन्होंने (अजित पवार ने) ऐसा जांच एजेंसियों के डर से किया है या नहीं। मेरे सूत्रों के अनुसार 10-11 विधायक राजभवन में मौजूद थे जिसमें से तीन इस समय मेरे साथ बैठे हुए हैं।'
शरद पवार और एनसीपी के साथ हैं: एनसीपी विधायक
एनसीपी विधायक राजेंद्र शिंगणे ने कहा, 'अजित पवार ने मुझे कुछ चर्चा करने के लिए बुलाया था और वहां से मुझे अन्य विधायकों के साथ राजभवन ले जाया गया। इससे पहले कि हम कुछ समझ पाते शपथग्रहण समारोह खत्म हो गया। मैं पवार साहब के पास गया और उन्हें बताया कि मैं शरद पवार और एनसीपी के साथ हूं।' इसी तरह एनसीपी के दो और विधायक- संदीप क्षीरसागर और सुनील भुसारा ने भी आरोप लगाया है कि उन्हें अनजाने में शपथ समारोह में ले जाया गया था। अब वह वापस आ गए हैं और उन्होंने शरद पवार के पक्ष में अपना समर्थन दिया है।
संयुक्त प्रेस कांफ्रेस से बाहर निकले कांग्रेस नेता
कांग्रेस नेता बाला साहेब थोराट और अशोक चव्हाण शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की महाराष्ट्र की सियासत को लेकर होने वाली संयुक्त प्रेस कांफ्रेस से बाहर निकल गए हैं। अब वह अलग से बैठक करेंगे।
शरद पवार के समर्थन में लगे नारे
वाईबी चव्हाण केंद्र में एनसीपी कार्यकर्ताओं ने शरद पवार के समर्थन में नारे लगाए। वह यहां एक प्रेस कांफ्रेंस के लिए पहुंचे हैं।
यह संविधान का मजाक: दिग्विजय सिंह
महाराष्ट्र में सरकार गठन पर कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि 'यह संविधान का मजाक बन रहा है, भाजपा ने गोवा, मेघालय और अन्य राज्यों में भी ऐसा ही किया। राकांपा का कोई भी विधायक इसका समर्थन नहीं करेगा, अजित पवार अकेले उनके साथ गए हैं।'
विधायकों के हस्ताक्षर का हुआ दुरुपयोग
वहीं एनसीपी के वरिष्ठ नेता नवाब मलिक ने आरोप लगाया कि हमने उपस्थिति के लिए विधायकों से हस्ताक्षर लिए थे, उसका शपथग्रहण के लिए दुरुपयोग किया गया। ये धोखे से बनाई गई सरकार है और विधानसभा के फ्लोर पर हारेगी। पार्टी के सारे विधायक हमारे साथ हैं। बता दें कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने पार्टी के विधायकों की बैठक बुलाई है। ये बैठक शाम 4.30 बजे होनी है।
मैं वास्तव में बहुत दुखी हूं: संजय निरुपम
महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने कहा, 'लोग सोच रहे होंगे कि मैं आज के घटनाक्रम से खुश होउंगा, लेकिन मैं वास्तव में बहुत दुखी हूं। इसमें कांग्रेस को अनावश्यक रूप से बदनाम किया गया। उन्होंने कहा कि शिवसेना के साथ गठबंधन की सोच एक गलती थी। मैं सोनिया जी से अपील करता हूं कि वे सबसे पहले कांग्रेस वर्किंग कमेटी को भंग करें।'
शरद पवार-सुप्रिया सुले (फाइल फोटो)
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परिवार और पार्टी हुए अलग: सुप्रिया सुले
शरद पवार की बेटी और एनसीपी नेता सुप्रिया सुले ने वाट्सएप पर ऐसा स्टेटस डाला है जिससे लग रहा है कि परिवार दो हिस्सों में बंट गया है। उन्होंने लिखा, 'परिवार और पार्टी अलग हो गए हैं।' उनके इस बयान की पुष्टि उनके कार्यालय ने भी की है।
इस तरह यू-टर्न होगा सोचा नहीं था: तारिक अनवर
कांग्रेस ने एनसीपी पर विश्वासघात करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता तारिक अनवर का कहना है कि कोई इस तरह से यू-टर्न लेगा किसी ने सोचा तक नहीं था।
अजित पवार का व्यक्तिगत निर्णय: शरद पवार
शरद पवार का कहना है कि यह सब मेरी जानकारी के बिना हुआ। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए भाजपा को समर्थन देने का अजित पवार का फैसला उनका व्यक्तिगत निर्णय है। यह एनसीपी का फैसला नहीं है। हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हम इस फैसले का समर्थन नहीं करते।'
कांग्रेस ने बुलाई बैठक
राज्य में बदले इस सियासी समीकरण को लेकर आज कांग्रेस ने मुंबई में पार्टी कार्यालय में एक तत्काल बैठक बुलाई है। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल मौजूद रहेंगे।
शनिवार को यूं स्पष्ट हो जाती स्थिति
राजनीतिक गलियारों में हो रही हलचल के दौरान कहा जा रहा था कि पांच साल तक उद्धव ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे। हालांकि शरद पवार का ये भी कहना था कि अभी कुछ मुद्दों पर बात बाकी है। इसे लेकर शनिवार को प्रेस कांफ्रेस भी होनी थी, जिसमें स्थिति साफ हो जाती है। वहीं उद्धव ने बैठक को लेकर कहा था कि सकारात्मक चर्चा हुई। हम नहीं चाहते कि तीनों पार्टियों के बीच किसी भी मुद्दे पर बाद में कोई गतिरोध हो। हालांकि उन्होंने सीएम पद को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की।
पाप करने वाले व्यक्ति की झुकी रहती हैं नजरें: संजय राउत
शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा, 'शरद पवार साहब का इससे कोई लेना-देना नहीं है। अजित पवार ने महाराष्ट्र के लोगों को धोखा दिया है। कल नौ बजे तक ये महाशय (अजित पवार) हमारे साथ बैठे थे। बाद ये अचानक गायब हो गए। वो नजर से नजर मिलाकर बात नहीं कर रहे थे। उससे हमें शक भी हुआ था। जो व्यक्ति पाप करने जाता है उसकी नजरें जैसे झुकती हैं वैसे बी झुकी नजरों से बात कर रहे थे।'
सियासत हूं मैं, कपड़े नहीं पहनती: रणदीप सुरजेवाला
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा मुझे मत देखो यूं उजाले में लाकर, सियासत हूं मैं, कपड़े नहीं पहनती। इसे कहते हैं: जनादेश से विश्वासघात, लोकतंत्र की सुपारी।'
पवार जी तुस्सी ग्रेट हो: अभिषेक मनु सिंघवी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर कहा, 'महाराष्ट्र के बारे में पढ़कर हैरान हूं। पहले लगा कि यह फर्जी खबर है। निजी तौर पर बोल रहा हूं कि तीनों पार्टियों की बातचीत तीन दिन से ज्यादा नहीं चलनी चाहिए थी। यह बहुत लंबी चली। मौका दिया गया तो फायदा उठाने वालों ने इसे तुरंत लपक लिया। पवार जी तुस्सी ग्रेट हो। अगर यही सही है तो आश्चर्यजनक है। अभी यकीन नहीं है।'
देवेंद्र फडणवीस-अजित पवार
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कौन हैं देवेंद्र फडणवीस
देवेंद्र फडणवीस का जन्म महाराष्ट्र के नागपुर में 22 जुलाई 1970 को हुआ था। उन्होंने 2006 में अमृता रानाडे से विवाह किया। वह एक्सिस बैंक में काम करती हैं। देवेंद्र और अमृता की एक बेटी दिविजा है। साल 2001 में वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए। देवेंद्र फणवीस भी किताबें लिखना पसंद करते हैं। वे तीन मराठी किताब लिख चुके हैं।
कौन हैं अजित पवार
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई, 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में उनके दादा-दादी के यहां हुआ। अजित पवार एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं। उनके पिता वी शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। अजित पवार अपने चाचा के नक्शेकदम पर चलते हुए राजनीति में आए।
राजनीति में वह एक राजनेता से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री बने। वह अपने चाहने वालों और जनता के बीच दादा (बड़े भाई) के रूप में लोकप्रिय हैं। अजित पवार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देओली प्रवर से की और उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड से की। पवार ने केवल माध्यमिक विद्यालय स्तर तक ही पढ़ाई की।