सूत्रों के अनुसार, एनसीपी के 13 विधायक अजित पवार के साथ मजबूती से खड़े हैं। इनमें से भले ही कुछ विधायकों ने शरद पवार और सुप्रिया सुले से बातचीत की है लेकिन उन्होंने अपने बयान में इस बात को जरूर कहा है कि जो भी शरद पवार और अजित पवार का फैसला होगा वह उन्हें मंजूर होगा।
इन 13 विधायकों द्वारा बार-बार अजित पवार का नाम लेना कहीं न कहीं पार्टी में सबकुछ ठीन न होने की तरफ इशारा कर रहे हैं। महाराष्ट्र एनसीपी अध्यक्ष जयंत पाटिल, नवाब मलिक और दूसरे वरिष्ठ नेता बार-बार अजित पवार को मनाने की बात कर रहे हैं। अजित के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात पर नेता बयान देने से बच रहे हैं।
36 से कम विधायक भाजपा के पक्ष में गए तो लागू होगा दल-बदल कानून
दल-बदल कानून के अनुसार अगर एनसीपी के कुल संख्याबल का दो तिहाई (36 विधायक) से कम विधायकों ने भाजपा का समर्थन किया तब इनपर अयोग्यता की तलवार लटक सकती है। हालांकि इतने विधायकों के समर्थन के बाद भी भाजपा को बहुमत साबित करने के लिए अन्य विधायकों की जरूरत पड़ेगी। भाजपा के वरिष्ठ नेता आशीष शेलार बार-बार 170 विधायकों का समर्थन होने का दावा कर रहे हैं।
दल-बदल कानून के अनुसार विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने का आधार स्पष्ट किया गया है।
- कोई विधायक स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता त्याग दे।
- वह पार्टी द्वारा जारी किए गए व्हिप के खिलाफ जाकर वोट करे या फिर वोटिंग से दूर रहे।
- निर्दलीय विधायक किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो जाएं
- एक पार्टी के दो तिहाई से कम विधायक दूसरी पार्टी में शामिल हो जाएं