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Maharashtra: शिवाजी की मूर्ति गिरने को लेकर सड़कों पर राजनीति; शिवसेना ने निकाला मार्च, भाजपा विरोध में उतरी

Sun, 01 Sep 2024 10:29 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

प्रदर्शन को लेकर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ये जो आज आंदोलन हो रहा है, पूरे तरीके से राजनीतिक आंदोलन है। इन्होंने कभी भी छत्रपति शिवाजी महाराज का सम्मान नहीं किया।
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शिवाजी महाराज की प्रतिमा। - फोटो : PTI
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विस्तार
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महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाडी (एमवीए) ने सिंधुदुर्ग जिले में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा ढहने के विरोध में रविवार को दक्षिण मुंबई में प्रतिष्ठित हुतात्मा चौक से ‘गेटवे ऑफ इंडिया’ तक मार्च निकाला। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-एसपी) सुप्रीमो शरद पवार, शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (शिवसेना-यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे, कांग्रेस की राज्य इकाई के प्रमुख नाना पटोले और पार्टी की मुंबई इकाई की प्रमुख वर्षा गायकवाड़ ने ‘संयुक्त महाराष्ट्र’ आंदोलन में शहीद हुए लोगों की याद में बने हुतात्मा चौक पर पुष्पांजलि अर्पित कर विरोध मार्च की शुरुआत की।

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राकांपा (एसपी) नेता राजेश टोपे और शिवसेना (यूबीटी) नेता सुनील प्रभु ने कहा कि विरोध मार्च का उद्देश्य प्रधानमंत्री द्वारा अनावरण किए जाने के आठ महीने बाद ही प्रतिमा ढह जाने को लेकर महाराष्ट्र के लोगों के गुस्से को आवाज देना है। 11 बजे के बाद शुरू हुए मार्च में हिस्सा लेने वालों में कोल्हापुर से कांग्रेस सांसद शाहू छत्रपति, राकांपा (एसपी) नेता एवं बारामती की सांसद सुप्रिया सुले और विधायक अनिल देशमुख शामिल हैं। वहीं, भाजपा मामले में हो रही राजनीति को लेकर बड़ा प्रदर्शन कर रही है। इसे लेकर शहर में बड़ी संख्या में पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
 

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अनिल देसाई ने कहा कि प्रधानमंत्री भावुक थे, उन्होंने इस घटना पर दुख जताया, लेकिन महाराष्ट्र सरकार को जो व्यक्त करना चाहिए था, उसने ऐसा नहीं किया। उन्होंने विपक्ष के साथ गलत तरीके से बातचीत शुरू कर दी और कहा कि हम इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं, जबकि यह सबसे भावनात्मक मुद्दा था, जो महाराष्ट्र ने पहले कभी नहीं देखा। हमने सब कुछ लोकतांत्रिक तरीके से किया था। हमने प्रशासन, पुलिस से अनुमति मांगी थी। हमें उम्मीद थी कि समय पर अनुमति मिल जाएगी, जो उन्होंने नहीं दी। इसके विपरीत जो तैनाती की जा रही है, उसे देखें। ऐसा लग रहा है कि कोई युद्ध जैसा विरोध होने वाला है। महाराष्ट्र की जनता जानती है कि कौन राजनीति कर रहा है और कौन हमारे स्वाभिमान के साथ सड़क पर है। सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए।
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शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे लिए भगवान जैसे हैं। उनकी मूर्ति गिर गई और उसके साथ ही हमारी भक्ति, सम्मान और स्वाभिमान भी टूटकर वहीं गिर गया। इतने अपमान के बावजूद इसका समर्थन करने वाले राजनीतिक दलों के नेता उनकी निंदा नहीं तो और क्या करेंगे? उद्धव ठाकरे ने कहा है कि यह महाराष्ट्र का अपमान है। हमें अपने ही महाराष्ट्र में अपनी ही पुलिस द्वारा रोका जा रहा है कि हम मार्च आगे नहीं बढ़ा सकते। मैंने ऐसी असहाय पुलिस कभी नहीं देखी। क्या होगा अगर उन्होंने माफी मांग ली? समय देखिए। क्या बयान राजनीतिक नहीं है? पीएम हमेशा राजनीतिक बयान देते हैं। अगर उन्हें इतनी सहानुभूति होती तो वे मणिपुर चले जाते। केंद्र सरकार की नीति महाराष्ट्र का अपमान करना है। यह आंदोलन महाराष्ट्र के सम्मान के लिए है, जिसका अपमान किया गया है।
 

एमवीए मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा: बावनकुले
इस बीच भाजपा ने महा विकास अघाड़ी के खिलाफ पूरे महाराष्ट्र में विरोध प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत बावनकुले ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ-साथ महान योद्धा-राजा के अनुयायियों से मूर्ति ढहने के मामले में माफी मांगी है। इसके बावजूद एमवीए वोट बैंक की राजनीति के लिए मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है। एमवीए विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है। भाजपा पार्टी कार्यकर्ताओं ने नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर और राज्य के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया और एमवीए को निशाना बनाया।
 

क्या है मामला?
दरअसल, इसी 26 अगस्त को सिंधुदुर्ग के राजकोट किले में स्थापित की गई छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिर गई।  सिंधुदुर्ग जिले में 4 दिसंबर, 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौसेना दिवस पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया था। 35 फुट की इस प्रतिमा का अनावरण नौसेना दिवस समारोह के हिस्से के रूप में किया गया था। आयोजन पहली बार राजकोट किले में किया गया था। इसका उद्देश्य समुद्री रक्षा और सुरक्षा के प्रति मराठा नौसेना और छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत एवं आधुनिक भारतीय नौसेना के साथ इसके ऐतिहासिक संबंधों का सम्मान करना था। इस परियोजना की परिकल्पना और संचालन भारतीय नौसेना ने राज्य सरकार के साथ मिलकर किया था। इसके लिए राज्य सरकार ने धन भी मुहैया कराया था। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रतिमा पर महाराष्ट्र सरकार ने 2.36 करोड़ रुपये खर्च किए थे।



विपक्ष क्या लगा रहा आरोप?
मूर्ति के गिरने के बाद से ही विपक्ष महायुति सरकार समेत प्रधानमंत्री के खिलाफ हमलावर है। एनसीपी (शपा) अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं कर सकती। जब भी किसी मूर्ति का निर्माण किया जाता है, तो राज्य अधिकारियों से अनुमति लेना आवश्यक होता है। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोगों ने देखा कि प्रतिमा कैसे गिर गई और लोग किस तरह के बयान दे रहे हैं। राज्य भवन समुद्र तट पर है, लेकिन राज्यपाल की टोपी भी कभी नहीं उड़ी और वे कहते हैं कि शिवाजी महाराज की प्रतिमा तेज हवाओं के कारण गिर गई, यह कैसे संभव है? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लोकसभा चुनाव की जल्दबाजी में मूर्ति का उद्घाटन कर दिया गया। पीएम ने अपराध किया है।

सरकार की सफाई
इस घटना के बाद राज्य की महायुति सरकार में शामिल दलों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को विपक्षी दलों से इस मामले का राजनीतिकरण न करने का आह्वान करते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का गहरा सम्मान है और उन्हें आदर और सम्मान देना सभी का कर्तव्य है।

प्रतिमा किस वजह से गिरी? 

  • सिंधुदुर्ग में पिछले सप्ताह भारी बारिश और तेज हवाएं चली थीं। घटना के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने तेज हवाओं के कारण प्रतिमा गिरने की बात कही। उन्होंने कहा, 'यह प्रतिमा नौसेना द्वारा स्थापित की गई थी। उन्होंने इसे डिजाइन भी किया था। लेकिन लगभग 45 किमी प्रति घंटा की तेज हवाओं के कारण यह गिर गई और क्षतिग्रस्त हो गई।' इसके अलावा भारतीय नौसेना ने एक बयान में कहा कि प्रतिमा को असाधारण मौसम की स्थिति के कारण दुर्भाग्यपूर्ण क्षति हुई है। 
  • संरचनात्मक इंजीनियर अमरेश कुमार ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, 'प्रतिमा मामले में, भार या जलवायु परिस्थितियों जैसे बाहरी कारणों से समस्या नहीं हुई है। बल्कि, नट और बोल्ट में जंग के कारण, जैसा कि पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट में जिक्र किया गया है, प्रतिमा के अंदर फ्रेम बनाने वाले स्टील की प्लेटों में खराबी आ सकती है।'
  • इस बीच, महाराष्ट्र कला निदेशालय के निदेशक राजीव मिश्रा ने कहा कि 35 फीट ऊंची प्रतिमा बनाने की नहीं बल्कि 6 फीट ऊंची प्रतिमा बनाने की अनुमति दी गई थी। निदेशालय को इसकी वास्तविक ऊंचाई और इसके निर्माण में स्टील प्लेट के इस्तेमाल के बारे में जानकारी नहीं थी।
पीएम मोदी ने मांगी माफी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सिंधुदुर्ग में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने को लेकर माफी मांगी। उन्होंने कहा, 'छत्रपति शिवाजी महाराज मेरे लिए सिर्फ नाम नहीं हैं। हमारे लिए छत्रपति शिवाजी महाराज अराध्य देव हैं। पिछले दिनों सिंधुदुर्ग में जो हुआ, मैं सिर झुकाकर मेरे अराध्य देव छत्रपति शिवाजी महाराज के चरणों में माथा रखकर माफी मांगता हूं।'

उन्होंने आगे कहा, 'हमारे संस्कार अलग हैं। हम वो लोग नहीं हैं जो आए दिन भारत मां के महान सपूत, इसी धरती के लाल वीर सावरकर को अनाप-शनाप बोलते हैं। अपमानित करते रहते हैं। देशभक्तों की भावनाओं को कुचलते हैं।' प्रधानमंत्री ने कहा, 'वे लोग वीर सावरकर को अपशब्द कहने के बाद भी माफी मांगने को तैयार नहीं हैं। उनको पाश्चाताप नहीं होता है। महाराष्ट्र की जनता उनके संस्कार को अब जान गई है।' 
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