असली लड़ाई शिवसेना से ज्यादा हिंदुत्व की
महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु कहते हैं कि दरअसल आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनाव होने हैं। बीएमसी का होने वाला चुनाव महाराष्ट्र में खासकर मुंबई में चलने वाली सरकार के बराबर ताकत रखता है। ऐसे में असली लड़ाई शिवसेना से ज्यादा हिंदुत्व की है। हिमांशु कहते हैं कि सिर्फ एकनाथ शिंदे ही नहीं, बल्कि शिवाजी पार्क में दशहरा रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने भी असली हिंदुत्व की बात कही। उद्धव ठाकरे ने कहा उन्होंने बालासाहब के विचारों को नहीं छोड़ा है। उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि वह एक मंच पर आकर हम से चर्चा करें, तो बताया जाएगा कि उनका हिंदुत्व क्या है। शिवाजी पार्क में लोगों को संबोधित करते हुए जब उद्धव ठाकरे यह कह रहे थे कि भाजपा का साथ छोड़ने का मतलब हिंदुत्व छोड़ना नहीं होता है तो सीधे तौर पर यह साबित करना चाह रहे थे कि उन्होंने हिंदुत्व का ना तो साथ छोड़ा है ना हिंदुत्व छोड़ा है।
आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे
- फोटो : ANI
हिंदुत्व का असली झंडाबरदार बताने की कोशिश
दरअसल शिवसेना के नेता रहे एकनाथ शिंदे ने जब से महाराष्ट्र में भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई है, तब से लड़ाई असली और नकली शिवसेना के साथ-साथ असली और नकली हिंदुत्व का दम भरने वाले नेता और पार्टी की भी चल रही है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हिमांशु कहते हैं कि शिवसेना की जड़ में हिंदुत्व है। बाला साहब ठाकरे ने पार्टी का गठन किया तो उन्होंने उसी हिंदुत्व के सहारे अपनी पार्टी को आगे बढ़ाना शुरू किया, जो आज की तारीख में भाजपा के मुद्दे भी हैं। हिमांशु कहते हैं कि यही वजह है कि शिवसेना और भाजपा मिलकर हिंदुत्व के मुद्दे पर राजनीति करते रहे और प्रमुख मुद्दों पर एक राय होकर आगे की रणनीति भी बनाते रहे। क्योंकि बीते कुछ दिनों में ऐसे हालात बने जिसमें 2019 की सरकार में वर्षों से चले आ रहे गठबंधन को झटका लगा और शिवसेना भाजपा से अलग हो गई।
वह कहते हैं, जब शिवसेना ने महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी, तभी से यह चर्चा होने लगी थी कि शिवसेना ने अपने जड़ में पड़ी हिंदुत्ववादी राजनीति को छोड़ना शुरू कर दिया है। लेकिन पूरी कसर बीते कुछ महीने पहले एकनाथ शिंदे ने तब पूरी कर दी, जब वह शिवसेना से विधायकों को तोड़कर भाजपा के साथ मिलकर नई सरकार बना ले गए। राजनीतिक विश्लेषक अमोल शितोले कहते हैं कि महाराष्ट्र में हिंदुत्ववादी एजेंडा और मुद्दा शुरुआत से ही हावी रहा है। यही वजह है कि एकनाथ शिंदे और ठाकरे परिवार खुद को हिंदुत्व का असली झंडाबरदार बताने की कोशिश कर रहा है। यही कारण है कि दशहरे पर अलग-अलग मैदानों में हुई दशहरा रैली में दोनों नेताओं ने ताल ठोक कर खुद को असली हिंदुत्ववादी नेता और असली हिंदुत्ववादी पार्टी के तौर पर पेश करने की कोशिश की।