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Maharashtra: कई दिनों से लिखी जा रही थी 'अजित पवार' की पटकथा, भतीजे ने इशारा भी किया,नहीं समझ सके शरद 'चाचा'

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sun, 02 Jul 2023 05:30 PM IST

सार

महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि कुछ दिनों से एनसीपी प्रमुख शरद पवार और भतीजे अजित पवार के बीच केवल औपचारिकता पूर्ण बातचीत हो रही थी। अजित, ऐसा कोई कदम उठा सकते हैं, इस बाबत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने शरद पवार और सुप्रिया सुले को जानकारी दी गई थी।
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अजित ने पलट दी रोटी। - फोटो : अमर उजाला


वह जानकारी भी बड़े पवार को नहीं थी ...  

महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि कुछ दिनों से एनसीपी प्रमुख शरद पवार और भतीजे अजित पवार के बीच केवल औपचारिकता पूर्ण बातचीत हो रही थी। अजित, ऐसा कोई कदम उठा सकते हैं, इस बाबत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने शरद पवार और सुप्रिया सुले को जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद उन्हें अजित पर भरोसा था। वे मानते रहे कि अजित के साथ कितना ही मनमुटाव क्यों न हो, मगर वह पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जाएगा। पिछले ही दिनों अजित पवार ने कहा था कि वे नेता प्रतिपक्ष के पद की जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं। उन्होंने शरद पवार तक अपनी वह बात पहुंचा दी थी कि वे पार्टी संगठन में काम करने के इच्छुक हैं। चूंकि शरद पवार को भरोसा था कि वह इस तरह का कदम नहीं उठाएगा, इसलिए रविवार को अजित ने जब एनसीपी विधायकों की बैठक बुलाई तो वह जानकारी भी बड़े पवार को नहीं थी। पुणे में मौजूद शरद पवार ने कहा, मुझे पार्टी विधायकों की बैठक की कोई जानकारी नहीं है। वे 6 जुलाई को वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। 


पटकथा के इस संवाद को भी समझ नहीं सके बड़े पवार ... 

महाराष्ट्र में दो मई को जब शरद पवार ने पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने की बात कही तो अजित ने उस बाबत कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी। वे उस जगह पर मौजूद थे, जहां शरद पवार ने पार्टी प्रमुख का पद छोड़ा था। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता रोने लगे थे। कई नेता बड़े पवार से कह रहे थे कि वे पार्टी प्रमुख के पद पर बने रहें। दूसरी ओर अजित ने इस बात का विरोध नहीं किया। अजित को यह उम्मीद थी कि अब चाचा शरद पवार, विश्राम की बात कह कर उन्हें पार्टी की कमान सौंप सकते हैं। इतना ही नहीं, जो नेता बड़े पवार के इस्तीफे का विरोध कर रहे थे, तब अजित ने कहा था, इनके विरोध से कुछ नहीं बदलेगा। मतलब, अजित पूरी तैयारी में थे कि उन्हें पार्टी की कमान मिल जाएगी। चौथे दिन जब शरद पवार ने इस्तीफा वापस लिया तो अजित पवार के चेहरे पर किसी ने खुशी नहीं देखी। शरद ने प्रेसवार्ता में जब इस्तीफा वापस लेने की बात कही तो उस वक्त अजित पवार वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद शरद पवार ने 10 जून को पार्टी के स्थापना दिवस पर अपनी बेटी सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद अजित पवार की नाराजगी और ज्यादा बढ़ गई। 


क्लीन चिट मिलना भी पटकथा का हिस्सा ... 

प्रवर्तन निदेशालय ने कथित महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले में अजित पवार पर नकेल कसने की पूरी तैयारी कर ली थी। धनशोधन रोधी कानून के तहत उनके परिवार की 65 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की चीनी मिल को कुर्क कर दिया गया। तब ईडी ने यह संकेत दिया था कि यह मिल तो अजित पवार के परिवार से जुड़ी है। मामले में उनकी पत्नी सुनेत्रा अजित पवार का नाम भी शामिल था। सतारा जिले के चिमनगांव-कोरेगांव स्थित जरांदेश्वर सहकारी चीनी कारखाना (जरंदेश्वर एसएसके) मिल की भूमि, भवन, संरचना, प्लांट और मशीनरी को जब्त कर लिया गया। महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने अजित पवार को 70 हजार करोड़ के कथित सिंचाई घोटाले का आरोपी बताया। इस मामले की जांच मुंबई हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई थी। महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने अदालत को बताया कि इस घोटाले में अजित पवार और उनके साथ रहे विभिन्न अफसरों की चूक सामने आई है। महाराष्ट्र में उस वक्त कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में अजित पवार को सिंचाई विभाग दिया गया था। सिंचाई घोटाले से जुड़े 17 मामलों में अजित को क्लीन चिट दे दी गई। 5000 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में अजित पवार सहित 70 लोगों को आरोपी बनाया गया। अक्तूबर 2020 में इस केस में भी पवार को क्लीन चिट मिल गई। 


पटकथा को भांप गए थे संजय राउत... 

जब अजित पवार को क्लीन चिट मिली तो शिवसेना उद्धव गुट के नेता संजय राउत पटकथा को भांप गए थे। ईडी की चार्जशीट में अजीत पवार और उनकी पत्नी का नाम नहीं होने पर संजय राउत ने हैरानी जताई थी। उन्होंने कहा, अब तो ये पूरी तरह साफ हो गया है कि भाजपा ने ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग किया है। जब पवार के खिलाफ मामला दर्ज हुआ तो जांच एजेंसी ने इस तरह का दम दिखाया था कि अजित और उनके परिवार पर कानून की गाज गिरना तय है। कभी तो पवार परिवार की संपत्तियां जब्त की गई तो कभी उनके ठिकानों पर छापे मारे गए। जब चार्जशीट दायर करने का वक्त आया तो जांच एजेंसी को उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। इसके बाद अजित पवार ने भी कह दिया कि अगर आरोप साबित होते हैं तो वह राजनीति छोड़ देंगे। कर्नाटक के चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी की तुलना एक जहरीले सांप से की थी। उस वक्त भी अजित पवार ने कहा, आज नरेंद्र मोदी हमारे प्रधानमंत्री हैं। इससे पहले मनमोहन सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी थे। देश के प्रधानमंत्री या राज्य के मुख्यमंत्री के बारे में इस तरह का बयान देना सही नहीं लगता। 
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