प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास विस्फोटक कार मिलने के बाद शुरू हुई महाराष्ट्र सरकार की मुसीबत थमने का नाम नहीं ले रही है। इस बीच मुंबई पुलिस के महत्वपूर्ण विभाग क्राइम इंटेलिजेंट यूनिट (सीआईयू) के चीफ सचिन वाजे की गिरफ्तारी और उसके बाद मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह के लेटर बम से ठाकरे सरकार हलाकान है।
एंटीलिया प्रकरण के बाद महाराष्ट्र में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एंट्री से मामले में नया मोड़ आया है। एनआईए की पूछताछ में सचिन वाजे के नए राज सामने आ रहे है। जांच में पता चला है कि वाजे ने ही एंटीलिया के पास जिलेटिल की छड़ें लदी स्कार्पियो पार्क किया था। कार से मिला पत्र जिसमें मुकेश अंबानी को धमकी दी गई थी, उसे भी वाजे ने लिखवाया था।
सरकार में संकट पैदाकर राजनीतिक मकसद साध सकती है भाजपा
परमपत्र से शिवसेना और एनसीपी में दरार पैदा होने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन इससे शिवसेना और एनसीपी का गठजोड़ और मजबूत हो गया है। हालांकि कांग्रेस दुविधा की स्थिति में है लेकिन वह भी सत्ता से चिपके रहना चाहती है। संविधान के जानकार कहते हैं कि पूर्ण बहुमत वाली सरकार को अस्थिर करना मुश्किल है। लेकिन आने वाले दिनों में सरकार के घटक दलों के अंदर ही असंतोष की भावना बढ़ाने की कोशिश हो सकती है। भाजपा चाहेगी कि एमवीए सरकार के अंदर संकट पैदा कर दिया जाए जिससे उनका राजनीतिक मकसद पूरा हो सके। भाजपा प्रयत्न करेगी कि सहयोगी पार्टियों में इतना अतर्विरोध बढ़े और सरकार गिर जाए। जिसके बाद मध्यावधि चुनाव कराया जा सके।
अब तक सवा सौ बार हो चुका है धारा 356 का इस्तेमाल
संविधान के जानकार प्रो. उल्हास बापट कहते हैं कि धारा 356 को लेकर डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि यह लागू नहीं होगा। लेकिन देश में सबसे ज्यादा इसी का दुरुपयोग हुआ। अब तक सवा सौ बार राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है। साल 1977 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री चौधरी चरण सिंह उन नौ राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था जहां कांग्रेस बहुमत में थी। उसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका भरपूर इस्तेमाल किया और फिर यह परंपरा चलती रही। केंद्र सरकार दूसरी पार्टियों की सरकार को अस्थिर करने के लिए धारा 356 लगाकर राष्ट्रपति शासन लागू करती है। बापट कहते हैं कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए अभी ठोस आधार नजर नहीं आता। इसलिए महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगने की संभावना नहीं है।
सचिन वाजे की जांच पर निर्भर है एमवीए का भविष्य
वरिष्ठ पत्रकार मधु कांबले का कहना है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन एनआईए की गिरफ्त में आए सचिन वाजे की जांच पर एमवीए का भविष्य निर्भर है। क्योंकि वाजे प्रकरण बेहद गंभीर है। इसलिए एनआईए की जांच में क्या निकलता है। यह महत्वपूर्ण है। लेकिन, इस बीच भाजपा निश्चित तौर पर महा विकास आघाड़ी सरकार को परेशान करने की कोशिश करेगी और उनकी गलतियों पर पूरी निगाह रखेंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने परमबीर सिंह की याचिका को महत्व नहीं दिया। इससे सिंह को झटका लगा है। परमबीर सिंह के दावे में कितना दम है। यह कोर्ट तय करेगा क्योंकि कोर्ट को सबूत चाहिए। अगर कोर्ट ने किसी मंत्री के खिलाफ जांच का आदेश दिया तो राष्ट्रपति शासन की नौबत आ सकती है।