तमिलनाडु में जल्लीकट्टू पर लगी पाबंदी हटने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने भी राज्य में बैलगाड़ी दौड़ को मंजूरी दे दी है। बृहस्पतिवार को विधानसभा में प्राणियों पर क्रूरता से जुड़ा विधेयक ध्वनिमत से मंजूर किया गया। महाराष्ट्र में बैलगाड़ी दौड़ के कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। दौड़ में शामिल होने वाले बैल के साथ किसी प्रकार की क्रूरता होने पर तीन साल कैद या पांच लाख रुपये जुर्माने का भी प्रावधान है।
राज्य के पशुसंवर्धन मंत्री महादेव जानकर ने कहा कि विधेयक में बदलाव का मकसद राज्य में बैलगाड़ी दौड़ जैसे पारंपरिक खेलों और संस्कृति व परंपरा का संरक्षण है। इसके साथ ही बैल की मूल प्रजाति का संरक्षण सुनिश्चित करना भी इस विधेयक का मकसद है। जानकर ने कहा कि महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है जहां पशुओं के लिए एंबुलेंस सुविधा शुरू की गई है।
बैलगाड़ी दौड़ के दौरान भी वहां बैल के लिए एंबुलेंस तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बैलगाड़ी दौड़ आयोजित करने से पहले संबंधित जिले के जिलाधिकारी की अनुमति लेनी होगी। साथ ही, बैलों की सुरक्षा और सुविधा का भी ख्याल रखते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि प्राणियों को किसी तरह की चोट न पहुंचे।
तमिलनाडु में जल्लीकट्टू पर लगी पाबंदी हटाने के लिए विधेयक लाया गया था जिसके बाद महाराष्ट्र में भी इसी तरह का विधेयक लाने की मांग उठ रही थी। राज्य के कई इलाकों में छकड़ी और शंकरपट के नाम से बैलगाड़ी आयोजित की जाती थी लेकिन, पशुप्रेमी संगठनों की याचिका पर सुनवाई करते हुए बांबे हाईकोर्ट ने बैलगाड़ी दौड़ पर रोक लगा दी थी। बांबे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने भी बांबे हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया था।