पालघर के आदिवासी स्कूल में तेज बुखार से 7 साल के बच्चे की मौत के बाद 30 छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चांदीपुरा वायरस की आशंका से चिंता बढ़ी है, हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इसकी पुष्टि नहीं की है। पढ़िए रिपोर्ट-
महाराष्ट्र के पालघर में एक आदिवासी आवासीय स्कूल में 7 साल के छात्र की तेज बुखार से मौत हो गई। उसके बाद सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षण वाले 30 छात्रों को एहतियातन अस्पताल में भर्ती कराया गया। पालघर गुजरात से सटा है इसलिए चांदीपुरा वायरस बुखार की दहशत भी है।
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हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक चांदीपुरा वायरस से मौत की पुष्टि नहीं की है। पालघर जिले के मसवन आवासीय विद्यालय में पहली कक्षा के छात्र श्रेयांश शैलेश आंबात को 24 अगस्त को बुखार होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। सोमवार को तेज बुखार और ऑक्सीजन स्तर में गिरावट होने पर मनोर के जिला ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, चांदीपुरा वायरस (सीएचपीवी) रैब्डोविरिडे परिवार का एक वायरस है। इसका संबंध खास तौर पर बच्चों में होने वाले एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से है।
यह वायरस कुछ वाहक जीवों के जरिये फैलता है। इनमें सैंडफ्लाई, मच्छर और किलनी शामिल हैं। गुजरात में फ्लीबोटोमस पापाटासी नाम की सैंडफ्लाई को इस वायरस का वाहक बताया गया है।
यह बीमारी बुखार से शुरू हो सकती है। इसके बाद मरीज को दौरे पड़ सकते हैं और वह कोमा में जा सकता है। गंभीर मामलों में मरीज की मौत भी हो सकती है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, भारत में चांदीपुरा वायरस के पिछले प्रकोपों में इस बीमारी से मौत की दर 56 से 75 फीसदी तक रही है।