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घायल गोविंदाओं के बिल पर बवाल: शिवसेना नेताओं पर पालघर अस्पताल में मारपीट का केस, क्या है विवाद की वजह?

Sun, 06 Sep 2026 04:16 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, पालघर।

सार

पालघर के एक अस्पताल में घायल गोविंदा के सीटी स्कैन और इलाज को लेकर विवाद हुआ। अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों और कर्मचारियों से बदसलूकी का आरोप लगाया है और मामले में 17 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। वहीं शिवसेना नेता कुंदन संखे ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि वह घायल गोविंदा के इलाज और डिस्चार्ज को लेकर बात करने अस्पताल पहुंचे थे। क्या है पूरा मामला? जानिए...
 
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पालघर अस्पताल में बवाल - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पालघर में दही हांडी के दौरान घायल हुए गोविंदाओं के इलाज के बिल को लेकर बड़ा विवाद हो गया। आरोप है कि शिवसेना के कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में घुसकर डॉक्टर और कर्मचारियों से मारपीट की। पुलिस ने इस मामले में कुल 17 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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यह घटना रविवार तड़के पालघर के रिलीफ अस्पताल में हुई। पुलिस के मुताबिक, शनिवार रात दही हांडी कार्यक्रम में मानव पिरामिड बनाते समय पांच गोविंदा घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। घायलों की पहचान ओंकार कलवाडकर, आकाश पाटील, हितेश चौधरी, केशव ठाकुर और अनिकेत महायवंश के तौर पर हुई है। ये सभी शिवसेना के केंद्रीय कार्यालय के बाहर आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में घायल हुए थे।

क्या है पूरा मामला? 
पुलिस के अनुसार, रात करीब 12 बजे तक पांचों मरीजों का कुल मेडिकल बिल 19,866 रुपये हो गया था। इसमें से 10 हजार रुपये नकद जमा किए गए थे। आरोप है कि इसके बाद बाकी रकम को लेकर विवाद शुरू हो गया। कुछ लोगों ने मरीजों को बाकी बिल चुकाए बिना ही अस्पताल से छुट्टी देने की मांग की। इसी बात को लेकर अस्पताल के कर्मचारियों से बहस हुई।
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एफआईआर के मुताबिक, रात करीब 1:15 बजे 15 से 20 लोग अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड में पहुंचे। आरोप है कि इस भीड़ का नेतृत्व शिवसेना जिला प्रमुख कुंदन बालकृष्ण सांखे और शहर प्रमुख राहुल रामदास घराट कर रहे थे। आरोप है कि भीड़ ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर लिजोमोल से गाली-गलौच की। अस्पताल के बिलिंग रिसेप्शनिस्ट विवेक बाबुलिंगा को थप्पड़ भी मारा गया।

क्या आईसीयू में भी घुसी भीड़?
मामला यहीं नहीं रुका। पुलिस के मुताबिक, भीड़ अस्पताल के आईसीयू तक पहुंच गई। इससे वहां भर्ती मरीजों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई। आरोप है कि भीड़ ने आईसीयू से घायल गोविंदाओं में से एक मरीज को जबरन बाहर निकाल लिया। अस्पताल के कर्मचारी विवेक बाबुलिंगा की शिकायत पर पुलिस ने यह मामला दर्ज किया है।

विधायक के बेटे समेत कितने लोग नामजद?
पुलिस ने मामले में 17 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें 10 लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें शिवसेना के पालघर जिला प्रमुख कुंदन बालकृष्ण सांखे, शहर प्रमुख राहुल रामदास घराट और विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित शामिल हैं। इसके अलावा मनीष उर्फ विक्की सांखे, सैराज पाटील, राहुल सांखे, मनोज घराट, नीलम सांखे, शुभम बांदिवडेकर और ऋषभ वारे के नाम भी एफआईआर में हैं। सात से आठ अन्य लोगों की पहचान अभी नहीं हुई है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?
पालघर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। इनमें मारपीट, धमकी, जबरन अस्पताल में घुसना और गैरकानूनी तरीके से भीड़ जुटाने जैसे आरोप शामिल हैं। मामले की जांच पुलिस उपनिरीक्षक विनायक केसरकर कर रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, रविवार को मामला दर्ज कर लिया गया है। हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। 

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एनसीपी 'सत्ता के अहंकार' का लगाया आरोप
इस बीच शरद पवार गुट वाली एनसीपी ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। पार्टी प्रवक्ता महेश तापसे ने इसे अस्पताल और चिकित्सा व्यवस्था पर हमला बताया। तापसे ने आरोप लगाया कि शिवसेना के पदाधिकारी अस्पताल में घुसे। उन्होंने डॉक्टरों और कर्मचारियों से बदसलूकी की। एक कर्मचारी को थप्पड़ मारा गया और अस्पताल में तोड़फोड़ की धमकी भी दी गई।
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तापसे ने कहा कि यह घटना अचानक हुए गुस्से का मामला नहीं लगती। उनके मुताबिक, यह सत्ता के संरक्षण में होने वाली गुंडागर्दी का उदाहरण है। उन्होंने डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में हुई कथित मारपीट का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि महाराष्ट्र में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ ऐसी घटनाओं का दोहराव चिंता बढ़ाने वाला है।
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