'सामना' अविभाजित शिवसेना का मुखपत्र था और इसकी शुरुआत दिवंगत बाल ठाकरे ने की थी। लेकिन पिछले साल जून माह में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद पार्टी दो भागों में बंट गई। तब से इस मुखपत्र पर उद्धव ठाकरे गुट का नियंत्रण हैं।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुखथ राज ठाकरे ने सोमवार को कहा कि वह अब 'सामना' और 'मार्मिक' को नहीं पढ़ते हैं। ये दोनों ही प्रकाशन उनके परिवार से जुड़े हैं और इसके लिए वह पहले सहयोग भी दे चुके हैं।
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'सामना' अविभाजित शिवसेना का मुखपत्र था और इसकी शुरुआत दिवंगत बाल ठाकरे ने की थी। लेकिन पिछले साल जून माह में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद पार्टी दो भागों में बंट गई। तब से इस मुखपत्र पर उद्धव ठाकरे गुट का नियंत्रण हैं।
वहीं, दूसरी पत्रिका 'मार्मिक' कार्टून के लिए समर्पित थी। इसे बाल ठाकरे और उनके भाई शिरकांत ने की थी। शिरकांत मनसे प्रमुख राज के पिता हैं। इस प्रकाशन की स्थापना साल 1966 में की गई थी।
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यह पूछे जाने पर कि क्या वह 'सामना' या 'मार्मिक' पढ़ते हैं, मनसे प्रमुख ने 'ना' में जवाब दिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह अपने आवास पर 'मार्मिक' को पढ़ते हैं। उन्होंने कहा, इन दिनों अखबारों में कोई खबर नहीं है। (टेलीविजन समाचार) चैनलों नहीं देखा जा सकता।
हाल ही में चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को असली शिवसेना घोषित किया था और उसे 'तीर-कमान' का चुनाव चिह्न दिया था। हालांकि, पार्टी की संपत्ति और संगठन के विभाजन और आधिकारिक मान्यता के बाद ही सही दावेदार का पचा चलेगा। इसको लेकर चर्चा जारी है। मध्य मुंबई में शिवसेना भवन और सामना दोनों उद्धव ठाकरे गुट के नियंत्रण में है।