महाराष्ट्र के मनोनीत राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा सोमवार को मुंबई पहुंच गए। वे जल्द ही अपना नया पद संभालेंगे। मुंबई हवाईअड्डे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जिष्णु देव वर्मा और उनकी पत्नी सुधा देव वर्मा का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार, महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति राम शिंदे, मुंबई की मेयर रितु तावड़े, पुलिस प्रमुख सदानंद दाते और मुंबई पुलिस कमिश्नर देवन भारती भी मौजूद थे। जिष्णु देव वर्मा 10 मार्च को दक्षिण मुंबई के लोक भवन में महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में शपथ लेंगे।
पुणे में गैस वाली श्मशान भट्टियां बंद, घरेलू गैस की सप्लाई को मिलेगी प्राथमिकता
पुणे नगर निगम (पीएमसी) ने शहर की गैस-आधारित श्मशान भट्टियों को कुछ समय के लिए बंद करने का फैसला लिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक नया निर्देश जारी किया है। इस निर्देश में कहा गया है कि घरेलू एलपीजी के लिए प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई को प्राथमिकता दी जाए। इसी वजह से पीएमसी ने यह कदम उठाया है। पुणे के म्युनिसिपल कमिश्नर नवल किशोर राम ने बताया कि श्मशान के सिस्टम में कोई खराबी या रुकावट नहीं आई है। शहर में कुल 27 श्मशान घाट हैं, जहां सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं। इनमें से 18 श्मशान घाटों में एलपीजी का इस्तेमाल होता है। गैस की सप्लाई में कमी न आए, इसलिए इन 18 जगहों पर कमर्शियल एलपीजी का इस्तेमाल रोका जा रहा है। कमिश्नर ने साफ किया कि प्रशासन के पास दूसरी सुविधाएं भी मौजूद हैं। कुछ श्मशान घाटों पर काम का बोझ ज्यादा है, जबकि कुछ पर कम है। प्रशासन यह पक्का करेगा कि लोग सभी उपलब्ध सुविधाओं का सही से इस्तेमाल करें। श्मशान घाटों के इस्तेमाल में संतुलन बनाने की पूरी कोशिश की जाएगी ताकि आम जनता को कोई परेशानी न हो।
हाजी अली दरगाह पर लगेगा दुनिया का सबसे ऊंचा तिरंगा
महाराष्ट्र में मुंबई के तट पर मशहूर हाजी अली दरगाह पर दुनिया का सबसे ऊंचा तिरंगा लगाने के लिए प्रदेश सरकार को एक प्रस्ताव दिया गया है। दरगाह के ट्रस्टी सुहैल खंडवानी ने रविवार को यह जानकारी दी। खंडवानी ने कहा कि वर्ली तट से करीब 500 मीटर दूर एक छोटे से टापू पर बनी दरगाह देश की सबसे खास रूहानी जगहों में से एक है। यहां हर साल लाखों लोग आते हैं। यह दरगाह 15वीं सदी के सूफी संत पीर हाजी अली शाह बुखारी की आखिरी आरामगाह है। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में इसकी बहुत अहम जगह है और यह आज भी विश्वास, सबको साथ लेकर चलने और सांप्रदायिक सद्भाव की एक मिसाल है। इस छोटे से टापू पर अब दुनिया का सबसे ऊंचा राष्ट्रीय झंडा होगा। हमने अनुमति के लिए महाराष्ट्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है। इस झंडे को देशभक्ति, एकता और देश की साझी पहचान का एक अहम निशान माना जा रहा है।