महाराष्ट्र के ठाणे में महिला पुलिस के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। ठाणे पुलिस के अनुसार, महिला जवान ने आर्मी के एक जवान पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। पुलिस ने बताया कि पुणे के बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर में तैनात सेना के एक जवान के खिलाफ शिकायत करते हुए 30 साल की महिला कांस्टेबल ने बताया कि वह मुंबई पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात है और ठाणे जिले के कल्याण में अकेले रहती है।
महिला ने बताया कि आरोपी से सोशल मीडिया पर डेढ़ साल पहले मिली थी। थोड़े दिनों बाद दोनों में दोस्ती हो गई। इसके बाद वह करीब आ गए। 2022 में आरोपी पहली बार पीड़िता से मिलने उसके घर आया। यहां उसने महिला को शराब पिलाने की कोशिश की। इसके बाद आरोपी जवान ने महिला के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद डेढ़ साल तक शादी का झांसा देकर आरोपी महिला से दुष्कर्म करता रहा। जब महिला ने शादी के लिए कहा तो जवान ने हाल में कहा कि वह उसके साथ शादी नहीं कर सकता क्योंकि वह आदिवासी समुदाय की है। महिला की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया।
जांच के लिए नागपुर पहुंची एनआईए
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को मिली धमकियों के मामले में गुरुवार को जांच के लिए एनआईए की टीम पहुंची। पुलिस ने बताया कि 14 जनवरी को आरोपी ने मंत्री को कॉल कर धमकाते हुए कहा कि वह दाऊद इब्राहिम के गिरोह का सदस्य है। इसके बाद उसने गडकरी से 100 करोड़ रुपए की मांग की। इसके बाद आरोपी ने 21 मार्च को दोबारा गडकरी को दोबारा 10 लाख रुपए की मांग के लिए कॉल किया।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और जयेश पुजारी उर्फ कांता को कर्नाटक की एक जेल से कॉल करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। कांता के ऊपर यूएपीए लागू किया गया फिर 28 मार्च को उसे नागपुर लाया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपी लश्कर-ए-तैयबा का गुर्गा था। उत्तर-पूर्व में उग्रवादियों से हथियार की ट्रेनिंग भी ले चुका है। गुरुवार को एक डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में एनआईए की टीम नागपुर पहुंचा है।
झुग्गीवासियों के लिए देवेंद्र फडणवीस ने किया एलान
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई और पुणे में स्लम में रहने वालों के लिए एक एलान किया है। गुरुवार को उन्होंने कहा कि दोनों शहरों में रहने वाले लोगों को 2.5 लाख रुपए का भुगतान करके अपना घर मिल सकता है। डिप्टी सीएम ने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री था तब मैंने साल 2000 से पहले झुग्गियों में रह रहे लोगों की सुरक्षा के लिए कानून बनाया था। जबकि, 2000 से 2011 के बीच बसे लोगों से राज्य सरकार घर आवंटित करने के लिए शुल्क लेती थी।झुग्गी पुनर्वास बोर्ड के अधिकारी सतीश लोखंडे ने बताया कि इससे पर घरों की कीमत 10-12 लाख तय की गई थी। लेकिन निम्न आय वर्ग वालों के लिए यह राशि काफी अधिक थी, इसलिए हमने दाम को घटाकर 2.5 लाख कर दिया है।