राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीज पर खुद का प्रचार करने के लिए राकांपा के प्रमुख शरद पवार के नाम को धूमिल करने का आरोप लगाया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता देवेंद्र फडणवीज ने हाल ही में एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा था कि 2019 में शरद पवार भाजपा के साथ सरकार बनाने पर सहमत हुए थे, लेकिन फिर तीन-चार दिन बाद ही वह पीछे हट गए थे।
डिप्टी सीएम के इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए राकांपा के प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो ने अपने एक बयान में कहा,' पिछले कुछ दिनों में विज्ञापनों में एकनाथ शिंदे से मात खाने के बाद अब देवेंद्र फडनवीस अपने दम पर प्रचार पाने की कोशिश कर रहे हैं। वह मुफ्त प्रचार पाने और एकनाथ शिंदे को मात देने के लिए साक्षात्कारों में राकांपा के प्रमुख शरद पवार के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं।'
महाराष्ट्र में 2019 विधानसभा चुनाव के बाद, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर भाजपा के साथ संबंध तोड़ लिया था। इसके बाद देवेंद्र फडनवीस ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण की और राकांपा नेता अजित पवार को डिप्टी सीएम बनाया गया था। हालांकि, यह सरकार केवल 80 घंटों तक ही बनी रही। इस दौरान ठाकरे ने राकांपा और कांग्रेस के साथ मिलकर राज्य में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) दल का गठन किया।
पिछले साल जून में, शिंदे ने शिवसेना नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह कर दिया, जिससे पार्टी विभाजित हो गई और एमवीए सरकार गिर गई। 30 जून 2022 को शिंदे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली और देवेंद्र फडणवीस को डिप्टी सीएम बनाया गया।
यूसीसी के अध्ययन के लिए कांग्रेस गठित किया पैनल
महाराष्ट्र कांग्रेस ने प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए गुरुवार को मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बालचंद्र मुंगेकर के नेतृत्व में एक समिति गठित की। राज्य इकाई के प्रमुख नाना पटोले द्वारा गठित नौ सदस्यीय समिति में पत्रकार और राज्यसभा सदस्य कुमार केतकर, वरिष्ठ नेता वसंत पुरके, हुसैन दलवई, अनीस अहमद, किशोरी गजभिये, अमरजीत मन्हास, जेनेट डिसूजा और रवि जाधव भी शामिल होंगे।
महाराष्ट्र कांग्रेस ने एक बयान में कहा कि मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदायों के अपने निजी कानून हैं जबकि हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध हिंदू नागरिक कानून द्वारा शासित होते हैं। आगे कहा कि यूसीसी किसी भी धर्म से जुड़ा नहीं है और यह सभी नागरिकों को कवर करेगा। दक्षिण भारत, पूर्वी भारत और आदिवासी क्षेत्रों में विवाह और विरासत से संबंधित अपने नियम हैं। अल्पसंख्यक समान नागरिक संहिता को अपने धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप मानते हैं। विभिन्न धार्मिक समुदायों के पास समान नागरिक संहिता है। यूसीसी पर उनके अपने विचार हैं।