महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के साथ आने पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उद्धव और राज ठाकरे मराठी हित में नहीं, बल्कि बीएमसी की सत्ता के लिए साथ आए हैं। साथ ही सरनाईक ने एकनाथ शिंदे की मराठी भाषा को क्लासिकल दर्जा दिलाने की कोशिशों की तारीफ की और UBT-MNS पर स्वार्थी राजनीति का आरोप लगाया।
20 साल बाद शनिवार को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ एक मंच पर आए। इसको लेकर राज्य भर में सियासी गर्माहट अपने चरम पर है। कई राजनीतिक पार्टियां खुले मंच से इस बात पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रही हैं। इसी बीच शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी रविवार को इस मामले में अपनी प्रतिकिया दी। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) मराठी लोगों के हित के लिए नहीं, बल्कि मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में सत्ता हासिल करने के लिए एकजुट हुए हैं।
बीएमसी के लिए साथ आए उद्धव-राज
बीएमसी में सत्ता के लिए 'विजय रैली': सरनाईक
सरनाईक ने वर्ली में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की तरफ से आयोजित विजय रैली पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि ये रैली मराठी के नाम पर नहीं, बल्कि बीएमसी की कुर्सी के लिए थी। इसके साथ ही महाराष्ट्र के मंत्री ने भायंदर में एक उत्तर भारतीय दुकानदार पर मराठी न बोलने को लेकर हुए हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों के लोग यहां मिलजुलकर रहते हैं, लेकिन कुछ लोगों ने इस माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की है।