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BJP-Shivsena: महाराष्ट्र में गठबंधन पर संकट! कर्नाटक से सीमा विवाद को लेकर प्रस्ताव लाने पर बंटे शिंदे-फडणवीस

Mon, 26 Dec 2022 07:33 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

शिंदे की बालासाहेबची शिवसेना के नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री शंभूराज देसाई ने पिछले हफ्ते कहा था कि उनकी पार्टी कर्नाटक से सीमा विवाद को लेकर सोमवार को विधानसभा में प्रस्ताव लाएगी। हालांकि, राज्य में भाजपा के नेतृत्व की तरफ से ऐसे किसी प्रस्ताव की बात नहीं की गई।
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देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे - फोटो : Social Media
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विस्तार
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महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच सीमा विवाद को लेकर टकराव अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि अब राज्य में इस मुद्दे को लेकर सरकार में ही फूट पड़ने की खबरें आने लगी हैं। ताजा मामला कर्नाटक में आने वाले क्षेत्र को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा में प्रस्ताव लाने से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि प्रस्ताव को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र वडणवीस एकमत नहीं हैं। प्रस्ताव पर दोनों ही नेताओं की राय अलग है। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार के दो शीर्ष नेताओं में टकराव से गठबंधन पर संकट पैदा हो सकता है। 
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प्रस्ताव को लेकर टकराव क्यों?
गौरतलब है कि शिंदे की बालासाहेबची शिवसेना के नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री शंभूराज देसाई ने पिछले हफ्ते कहा था कि उनकी पार्टी कर्नाटक से सीमा विवाद को लेकर सोमवार को विधानसभा में प्रस्ताव लाएगी। हालांकि, राज्य में भाजपा के नेतृत्व की तरफ से ऐसे किसी प्रस्ताव की बात नहीं की गई। कहा जा रहा है कि भाजपा कर्नाटक में अपने ही नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ मुद्दे को नहीं भड़काना चाहती। खासकर ऐसे समय में जब कर्नाटक में अगले ही साल चुनाव भी होने वाले हैं। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिंदे के मंत्री के एलान के बावजूद सोमवार को सरकार की तरफ से कर्नाटक सीमा विवाद को लेकर कोई प्रस्ताव लाने की चर्चा नहीं है। बालासाहेबची शिवसेना के नेताओं के मुताबिक, विधानसभा में इस प्रस्ताव को लेकर कोई नोटिफिकेशन नहीं जारी हुआ है। दरअसल, भाजपा नेता कर्नाटक की ओर से सीमा विवाद पर जारी किए गए प्रस्ताव के विरोध के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से अगले साल कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को दिक्कत आएगी। हालांकि, प्रस्ताव को लेकर चर्चा अभी जारी है और इसे विधानसभा में शीतकालीन सत्र के अंत में भी लाया जा सकता है। 
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शिंदे को लगातार घेर रहा विपक्ष
शिंदे समर्थक नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री इस प्रस्ताव को लाने के पक्ष में हैं, क्योंकि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाला विपक्ष उन पर हमलावर है। कई विपक्षी नेताओं ने शिंदे पर आरोप लगाया है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री के मुकाबले सीमा विवाद पर उनका पक्ष काफी कमजोर रहा है। इतना ही नहीं विपक्ष ने कई मौकों पर सरकार में शिंदे और फडणवीस की शक्तियों की तुलना करने की भी कोशिश की है।

कल पेश हो सकता है प्रस्ताव
इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि वह कर्नाटक के साथ विवादास्पद सीमा क्षेत्र में रहने वालों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए मंगलवार को राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश करेंगे। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन को आश्वासन दिया कि सीमा विवाद पर एक या दो दिन में एक प्रस्ताव पेश किया जाएगा। भाजपा के नेता ने कहा कि हम एक इंच के लिए भी लड़ेंगे। हम कर्नाटक में मराठी भाषी आबादी के न्याय के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं, करेंगे। 

उद्धव को शिंदे का जवाब
इससे पहले कर्नाटक विधानसभा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई द्वारा दक्षिणी राज्य के हितों की रक्षा के लिए सीमा रेखा पर एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था। उद्धव ठाकरे की आलोचना का जवाब देते हुए, शिंदे ने दावा किया कि पिछली एमवीए सरकार ने कर्नाटक के साथ महाराष्ट्र की सीमा के साथ गांवों में कुछ सरकारी योजनाओं को बंद कर दिया था। हमने 2,000 करोड़ रुपये की म्हैसल विस्तार योजना को मंजूरी दी। दरअसल, उद्धव ने मांग की थी कि कर्नाटक के मराठी भाषी क्षेत्रों को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाए।
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एक-एक इंच जमीन के लिए लड़ेगा महाराष्ट्र : फडणवीस

कर्नाटक के साथ सीमा विवाद पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार एक-एक इंच जमीन के लिए लड़ेगी। उन्होंने विपक्ष को आश्वस्त किया कि कर्नाटक की तर्ज पर विस में मंगलवार को प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने कहा, कर्नाटक में रह रहे मराठीभाषी लोगों के न्याय के लिए सरकार कुछ भी कर सकती है।

विस में सोमवार को महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद गूंजा। विपक्षी दलों ने मुद्दे पर प्रस्ताव पेश करने की मांग की। इससे पहले कर्नाटक विधानसभा ने बृहस्पतिवार को सीमा विवाद को लेकर सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर राज्य के हितों की रक्षा करने और पड़ोसी राज्य को एक इंच जमीन नहीं देने का संकल्प लिया था। इसी मुद्दे पर विपक्ष के नेता अजीत पवार ने सरकार से पूछा कि सरकार सीमा विवाद पर प्रस्ताव क्यों नहीं पेश करती, जबकि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में तय हुआ था कि शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में सरकार प्रस्ताव पेश करेगी।

उद्धव ने की सीमावर्ती इलाकों को केंद्रशासित प्रदेश बनाने की मांग...पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब तक सीमा विवाद का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तब तक कर्नाटक के कब्जे वाले मराठी गांवों को केंद्रशासित प्रदेश घोषित कर देना चाहिए। इस संबंध में राज्य सरकार सदन में प्रस्ताव लाए। उन्होंने कहा, यह केवल भाषा और सीमा का नहीं, बल्कि ‘मानवता’ का मामला है। 

सीमावर्ती गांवों में कई पीढ़ियों से मराठी भाषी लोग रह रहे हैं और उनकी जीवनशैली तथा भाषा मराठी है।
 
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