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Polls: अक्तूबर के दूसरे हफ्ते में होगा महाराष्ट्र-झारखंड चुनाव का एलान? भाजपा-कांग्रेस ने ECI से की यह मांग

Fri, 27 Sep 2024 05:47 PM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो

सार

चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव और राज्य के पुलिस प्रमुख से आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अधिकारियों के तबादले के अपने आदेशों को पूरी तरह लागू न करने पर स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने कहा कि 31 जुलाई को जारी निर्देश के बावजूद कि तीन साल से अधिक समय से अपने गृह जिलों या वर्तमान पद पर कार्यरत अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाए, राज्य प्रशासन ने प्रक्रिया पूरी नहीं की है।
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महाराष्ट्र दौरे पर पहुंची चुनाव आयोग की टीम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चुनाव आयोग की टीम महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 2024 की तैयारियों का जायजा लेने बृहस्पतिवार को देर शाम मुंबई पहुंची। महाराष्ट्र के दौरे पर पहुंचे मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू के साथ लगभग 12 अधिकारियों का दल है। आयोग अगले दो दिन तक राज्य में चुनावी तैयारी की समीक्षा करेगा। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को खत्म हो रहा है।

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इस बीच आयोग ने शुक्रवार को आगामी महाराष्ट्र चुनावों के लिए सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से उनके सुझाव मांगे। भाजपा ने कार्यदिवस पर मतदान का सुझाव दिया, जबकि कांग्रेस ने हाउसिंग सोसाइटियों में मतदान केंद्रों के होने पर आपत्ति जताई। यह प्रत्येक पार्टी के साथ आमने-सामने की बैठक थी। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुनाफ हकीम और गजानन देसाई ने किया। भाजपा का प्रतिनिधित्व मिहिर कोटेचा और आशीष शेलार ने किया।

कांग्रेस ने की पुलिस महानिदेशक को हटाने की मांग
वहीं, कांग्रेस ने चुनाव आयोग से विवादित और सत्ताधारी दल को मदद करने वाले अधिकारियों को हटाने की मांग भी की है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य की पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला का करियर विवादास्पद है। उन पर विपक्षी नेताओं को धमकाने के अलावा उनके फोन टैप करने जैसे गंभीर आरोप हैं। इसलिए पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए रश्मि शुक्ला समेत सभी विवादास्पद अधिकारियों को हटाया जाना चाहिए।
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मतदाताओं को असुविधा की शिकायतों पर कार्रवाई की चेतावनी
आयोग ने लोकसभा चुनाव के दौरान मुंबई शहर में मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को हुई असुविधा पर असंतोष व्यक्त किया और शीर्ष अधिकारियों को आगामी विधानसभा चुनावों में बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कहा। राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के साथ समीक्षा बैठक में अधिकारियों को मतदान केंद्रों पर बेंच, पंखे, पेयजल और शेड सहित सभी सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कहा गया। आयोग ने कहा कि मतदान के दिन मतदाताओं को असुविधा की किसी भी शिकायत पर वह सख्ती से कार्रवाई करेगा। 

चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव और डीजीपी से स्पष्टीकरण मांगा
इस बीच चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव और राज्य के पुलिस प्रमुख से आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अधिकारियों के तबादले के अपने आदेशों को पूरी तरह लागू न करने पर स्पष्टीकरण मांगा है। चुनाव आयोग ने कड़े शब्दों में लिखे पत्र में कहा कि 31 जुलाई को जारी निर्देश के बावजूद कि तीन साल से अधिक समय से अपने गृह जिलों या वर्तमान पद पर कार्यरत अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाए, राज्य प्रशासन ने प्रक्रिया पूरी नहीं की है। चुनाव आयोग (ईसी) के आदेश के अनुसार, अनुपालन रिपोर्ट 31 अगस्त तक देनी थी।

चुनाव की तारीखों का एलान कब?
आयोग अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में कभी भी चुनाव की तारीखों का एलान कर सकता है। संभावना जताई जा रही है कि दोनों राज्यों में नवंबर में एक साथ विधानसभा के चुनाव कराए जा सकते हैं।उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में पिछली बार अक्तूबर में ही विधानसभा के चुनाव हुए थे।

झारखंड पर भी टिकी हैं नजरें
इससे पहले मंगलवार को ही आयोग ने झारखंड का दो दिवसीय दौरा कर चुनावी तैयारियों का जायजा लिया था। झारखंड में पिछला चुनाव 30 नवंबर से 20 दिसंबर के संपन्न हुआ था। आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक तैयारियां चाक-चौबंद है और इस बार आयोग झारखंड में कम चरणों में चुनाव कर सकता है।

झारखंड की गठबंधन सरकार (47 विधायकों का समर्थन) में कितने दल शामिल हैं:

दल का नाम सीटों की संख्या
झामुमो 27
कांग्रेस 18
भाकपा माले 1
राजद 1

झारखंड विधानसभा में विपक्षी दलों का हाल:

दल का नाम सीटों की संख्या
भाजपा 24
आजसू 3
राकपा (अप) 1
निर्दलीय 2

झारखंड में भाजपा प्रमुख विपक्षी दल, कांग्रेस तीसरे नंबर पर
गौरतलब है कि झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल 27 विधायकों वाला झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) सबसे बड़ा दल है। 24 विधायकों के साथ भाजपा प्रमुख विपक्षी दल है। इसके अलावा 18 विधायकों वाली कांग्रेस संख्याबल के लिहाज से तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। 81 विधायकों वाली विधानसभा में चार सीटें खाली हैं।

देश की तीसरी सबसे बड़ी विधानसभा में सियासी समीकरण
महाराष्ट्र में इस बार सियासी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि लगभग 25 महीने पहले जून, 2022 में महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिरी थी। इसके बाद भाजपा समर्थित सरकार बनी। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दो-फाड़ होने के बाद राज्य में पहली बार विधानसभा चुनाव होंगे। महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार के पास 202 विधायकों का समर्थन है। 102 विधायकों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। अजीत पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के 40 विधायक हैं। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 18 विधायक हैं। 14 निर्दलीय विधायकों ने भी एनडीए सरकार को समर्थन दिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार को पांच अन्य छोटे दलों का समर्थन भी हासिल है।

विपक्ष कितना मजबूत
इसके अलावा विपक्षी खेमे (महाविकास अघाड़ी- MVA) में कुल 71 विधायक हैं। विपक्ष में कांग्रेस 37 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना के 16 विधायक हैं। वरिष्ठ राजनेता शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के 12 विधायक हैं। समाजवादी पार्टी के दो, सीपीआईएम और पीडब्लूपीआई के एक-एक विधायक हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के दो विधायक भी विपक्षी खेमे में हैं। 15 विधानसभा सीटें खाली हैं।

राजनीतिक चौसर पर तमाम जनप्रतिनिधियों की अग्निपरीक्षा
बता दें कि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी विधानसभा महाराष्ट्र है। 2019 में हुए पिछले आम चुनावों के बाद महाराष्ट्र और झारखंड में भी मुख्यमंत्री बदलने की नौबत आई।ऐसे में अब दोनों राज्यों के राजनीतिक चौसर पर तमाम जनप्रतिनिधियों की अग्निपरीक्षा होगी।

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