राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख जयंत पाटिल के पद से इस्तीफा देने की खबरों के बीच पार्टी ने शनिवार को इसका खंडन कर दिया। पार्टी ने कहा कि यह शरारत के अलावा कुछ नहीं है। पाटिल 2018 से अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रदेश अध्यक्ष हैं। जुलाई 2023 में अजित पवार और अन्य विधायकों के बाहर जाने की वजह से पार्टी के विभाजन के बाद पाटिल पार्टी के शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट एनसीपी (सपा) में उसी पद पर बने रहे।
पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता जितेंद्र आव्हाड ने एक बयान में कहा, 'जयंत पाटिल (एनसीपी-सपा) के प्रदेश अध्यक्ष हैं। उनके इस्तीफे की खबर फैलाना शरारत के अलावा कुछ नहीं है। पार्टी नियमों और अनुशासन के अनुसार काम करती है।' समाचार चैनलों सहित मीडिया के एक हिस्से में खबरें प्रकाशित हुईं कि पाटिल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और एमएलसी शशिकांत शिंदे उनके उत्तराधिकारी बनने वाले हैं।
इससे पहले 10 जून को राकांपा के 26वें स्थापना दिवस पर पाटिल ने पार्टी प्रमुख शरद पवार की उपस्थिति में पद छोड़ने के संकेत दिए थे। पाटिल ने कहा था कि पार्टी के लिए नए चेहरों को मौका देना जरूरी है। इस पर कार्यकर्ताओं में भावुक प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने उनसे पद पर बने रहने का आग्रह किया था।
उन्होंने कहा था कि पवार साहब ने मुझे बहुत मौके दिए। मुझे सात साल के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, अब पार्टी के लिए नए चेहरों को मौका देना जरूरी है। शरद पवार के वफादार पाटिल राकांपा के गठन के बाद से ही उनके प्रति वफादार रहे। 2023 में पार्टी में फूट के बाद भी उन्होंने पवार का साथ दिया। पाटिल तीन दशकों से ज्यादा समय से महाराष्ट्र विधानसभा में इस्लामपुर निर्वाचन क्षेत्र (सांगली जिला) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने उद्धव ठाकरे के मंत्रिमंडल में जल संसाधन विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया था। इससे पहले उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्री (2009-2014), वित्त मंत्री (1999-2008) और गृह मंत्री (2008-2009) के रूप में कार्य किया था। 2018 में उन्हें सर्वसम्मति से सुनील तटकरे की जगह अविभाजित राकांपा का प्रदेश अध्यक्ष चुना गया था।