सूत्रों के मुताबिक, भाजपा को उम्मीद थी कि 2014 की तरह एनसीपी प्रमुख शरद पवार इस बार भी उसे उबार लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाजपा ने बैकडोर से पवार से बातचीत जारी रखी, लेकिन ईडी की जांच, पार्टी नेताओं को तोड़ने के चलते उन्होंने भाजपा के हर पेशकश को ठुकरा दिया। 2014 में जब महाराष्ट्र में भाजपा 122 सीटें लाकर बहुमत से दूर थी तब पवार ने अपने 40 से अधिक विधायकों का समर्थन बिन मांगे देकर शिवसेना की मोलभाव की शक्ति खत्म कर दी थी। तब शिवसेना को बिना किसी शर्त के भाजपा को समर्थन देना पड़ा था।
शिवसेना को समर्थन देना कांग्रेस के लिए होगा घातक: निरुपम
मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने कांग्रेस को शिवसेना का समर्थन करने को लेकर चेताया है। निरुपम ने रविवार को ट्वीट किया, महाराष्ट्र के वर्तमान स्थिति के मुताबिक, कांग्रेस और एनसीपी के लिए सरकार बनाना असंभव है। इसके लिए हमें शिवसेना की जरूरत होगी। हमें किसी भी परिस्थिति में शिवसेना के साथ सत्ता बंटवारे के बारे में कोई विचार नहीं करना चाहिए। ऐसा करना कांग्रेस के लिए विनाशकारी हो सकता है।
वहीं, शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में एनसीपी प्रमुख शरद पवार की तारीफ की। सामना में संजय राउत ने लिखा, महाराष्ट्र में सरकार बनाने में प्रदेश के सबसे बड़े नेता शरद पवार की भूमिका काफी अहम होगी। कांग्रेस के कई विधायक भी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले है और उन्होंने महाराष्ट्र का फैसला महाराष्ट्र को सौंपने की सलाह दी है। कांग्रेस महाराष्ट्र की दुश्मन नहीं है और सभी दलों के कुछ मुद्दों पर मतभेद होते हैं।
मातोश्री में लगे उद्धव ठाकरे के पोस्टर
सूत्रों की मानें तो राजनीति के साथ ही शिवसेना के ज्योतिष सलाहकारों ने भी उद्धव को मुख्यमंत्री के रूप में आगे बढ़ने को कहा है। शिवसेना ने उद्धव के पुत्र आदित्य ठाकरे को चुनाव में मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश किया था परंतु रविवार को ठाकरे निवास मातोश्री के सामने पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने की मांग के पोस्टर लग गए।