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Maharashtra आरक्षित वन क्षेत्र में अतिक्रमण का प्रयास करने वाला गिरफ्तार; वकील से रिश्वत लेते पकड़े गए एसआई

Mon, 03 Nov 2025 07:10 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
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महाराष्ट्र की बड़ी खबरें - फोटो : अमर उजाला
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महाराष्ट्र में वन विभाग और एसआरपीएफ कर्मियों की एक संयुक्त टीम ने ठाणे में आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण के प्रयास को विफल कर दिया। एक अधिकारी ने बताया कि ठाणे के पास कलवा में की गई इस कार्रवाई के दौरान एक टेम्पो चालक को गिरफ्तार भी किया गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक टीम ने 30 अक्तूबर को ठाकुरपाड़ा गांव में आरक्षित वन भूमि पर एक लोडर ट्रक को रोका। चालक को 14 नवंबर तक मजिस्ट्रेट की हिरासत में भेज दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि यह अभियान ठाणे जिले के आरक्षित वन क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ व्यापक कार्रवाई का एक हिस्सा था।
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वकील से 45 लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया एसआई

महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर को आर्थिक अपराध के एक मामले में एक आरोपी के वकील से कथित तौर पर दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने और किश्तों में 45.5 लाख रुपये लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

वकील के मुवक्किल और उसके पिता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि मुवक्किल के पिता फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

एसीबी के एक अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच कर रहे पिंपरी चिंचवाड़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के सब-इंस्पेक्टर प्रमोद चिंतामणि ने आरोपी की जमानत याचिका पर अनुकूल जवाब दाखिल करने के लिए उसके वकील से कथित तौर पर दो लाख रुपये की मांग की थी।

उन्होंने बताया, "इस बीच, वकील ने एसीबी से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। अगले दौर की बातचीत में, सब-इंस्पेक्टर ने मांग बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दी और दावा किया कि 1 करोड़ रुपये विभाग के एक वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर को दिए जाएंगे। यह तय हुआ कि वकील किश्तों में रकम देगा, जिसकी पहली किश्त 50 लाख रुपये 2 नवंबर को दी जाएगी।"
 
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कांग्रेस ने मुंबई में 5,000 करोड़ के पीएपी घोटाले का लगाया आरोप
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ ने मलाड के परियोजना प्रभावित व्यक्तियों (पीएपी) के लिए बने आवास प्रोजेक्ट में 5000 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने इसे मुंबई के इतिहास का सबसे बड़ा पीएपी घोटाला करार दिया। फडणवीस सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और बीएमसी ने एक बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए पर्यावरण और प्लानिंग नियमों में हेरफेर किया।

गायकवाड़ ने कहा कि संजय गांधी नेशनल पार्क से सटे नो-डेवलपमेंट जोन की जमीन को 2023 में आवासीय क्षेत्र घोषित कर पुलिस हाउसिंग के लिए आरक्षित किया गया था, लेकिन उस पर पुलिस क्वार्टर न बनाकर 13,347 पीएपी यूनिट्स का प्रोजेक्ट लाया गया।

गायकवाड़ ने दावा किया कि यह प्रोजेक्ट सुप्रीम कोर्ट के पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों और नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ के आदेशों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि बीएमसी ने इस प्रोजेक्ट को ‘प्रोजेक्ट ऑफ वाइटल इम्पोर्टेंस’ का टैग देकर विकास शुल्क और प्रीमियम माफ कर दिए, जिससे निगम को ₹100 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ, जबकि बिल्डर को ₹1,000 करोड़ से ज्यादा का फायदा मिला।

अब इस मामले में वर्षा गायकवाड़ ने मांग की है कि राज्य सरकार तुरंत मालाड पीएपी प्रोजेक्ट रद्द करे, जारी की गई सभी क्रेडिट नोट्स और टीडीआर वापस ले, और इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय व समयबद्ध जांच कर संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई करे।
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