चुनाव समाप्त होने के बाद एग्जिट पोल इसलिए दिखाए जाते हैं, ताकि मतदाताओं के उपर किसी भी तरह का मनसिक दबाव नहीं बन पाए। जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 126 ए के मुताबिक मतदान के दौरान ऐसी कोई भी चीज नहीं होनी चाहिए जो वोटरों पर मनोविज्ञानिक असर डाले या उनके वोट देने कि फैसले को प्रभावित करे। ये तभी प्रसारित होता है जब सभी दौर का मतदान संपन्न हो चुका होता है।
कब शुरु हुआ एग्जिट पोल?
माना जाता है कि एग्जिट पोल की शुरुआत साल 1967 में हुई थी। नीदरलैंड के एक समाजशास्त्री और पूर्व राजनीतिज्ञ मार्सेल वान डेन अपने देश के चुनाव के दौरान एग्जिट पोल किया था। हालांकि ये भी कहा जाता है इसी साल अमेरिका में एक राज्य के चुनाव के दौरान पहली बार एग्जिट पोल किया गया था।
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि एग्जिट पोल हमेशा सही साबित होते हैं। कई बार ये गलत भी हुए हैं। जिसकी एक मुख्य वजह है, वोटिंग के दिन इकट्ठा किया जाने वाला डाटा। मतदान के दिन जब कोई एक वोटर से बात कर रहा होता है, उस बीच कई वोटरों की राय शामिल नहीं हो पाती है। जिसकी वजह से कई बार एग्जिट पोल गलत साबित भी होते हैं।