महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने शनिवार को कहा कि सरकार ने निजी प्रयोगशालाओं द्वारा किए जाने वाले कोरोना वायरस परीक्षणों की दरों को 4,500 रुपये से घटाकर 2,200 रुपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि परीक्षण की दर कम करने से लोगों को राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा, ‘अस्पतालों से वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया (वीटीएम) के माध्यम से स्वैब एकत्र करने के लिए अब 2,200 रुपये का शुल्क लिया जाएगा जबकि घर से स्वैब नमूने इकट्ठा करने पर यह खर्च 2,800 रुपये आएगा। इससे पहले यह शुल्क क्रमश: 4,500 और 5,200 रुपये था।’
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि संशोधित दरें अधिकतम हैं जिन्हें प्रयोगशालाएं वसूल सकती हैं। जिलाधिकारी दरों को और कम करने के लिए निजी प्रयोगशालाओं के साथ बातचीत कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘यदि निजी प्रयोगशालाएं निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक शुल्क वसूल करती हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’ उन्होंने दावा किया कि नई दरें देश में सबसे कम हैं।
मंत्री ने कहा कि वर्तमान में कोविड-19 परीक्षण के लिए राज्य में 91 प्रयोगशालाएं हैं और लगभग चार से पांच जल्द तैयार हो जाएंगी। उनके अनुसार सरकार ने पिछले हफ्ते राज्य में अधिकृत निजी प्रयोगशालाओं द्वारा किए जा रहे कोविड-19 परीक्षणों की दरों को तय करने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया था।
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राज्य स्वास्थ्य आश्वासन सोसाइटी के सीईओ सुधाकर शिंदे ने इस समिति की अध्यक्षता की। इसके अलावा ग्रांट गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की प्रोफेसर अमिता जोशी इसकी सदस्य और स्वास्थ्य सेवा निदेशक इसके सचिव सदस्य थे। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने राज्य में 44 सरकारी और 36 निजी प्रयोगशालाओं को कोरोना वायरस परीक्षण करने की अनुमति दी है।
जहां सरकार द्वारा संचालित प्रयोगशालाओं में परीक्षण मुफ्त हैं। वहीं आईसीएमआर ने निजी प्रयोगशालाओं में जांच के लिए 4,500 रुपये का शुल्क तय किया था। समिति का गठन इसलिए किया गया था क्योंकि आईसीएमआर ने निजी प्रयोगशालाओं से बातचीत करने और दरों को संशोधित करने के लिए कहा था।
पहले परीक्षण करने के लिए आवश्यक किटों को आयात किया जा रहा था। इसलिए आईसीएमआर ने निजी प्रयोगशालाओं के लिए शुल्क तय किए हुए थे। हालांकि अब किट का भारत में निर्माण हो रहा है इसलिए आईसीएमआर ने निजी प्रयोगशालाओं के साथ बात करके नई दरें तय करने के लिए कहा था।