महाराष्ट्र सरकार दक्षिण मुंबई में स्थित प्रसिद्ध एअर इंडिया की इमारत को खरीदने के करीब पहुंच गई है। इसके लिए राज्य के वित्त विभाग ने लोक निर्माण विभाग को 1,600 करोड़ रुपये स्थानांतरित कर दिए हैं। इसके साथ एअर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड के साथ समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
लोक निर्माण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समझौते का मसौदा (ड्राफ्ट) जांच के लिए भेजा जाएगा, ताकि उसमें कोई कमी न रह जाए। इस समझौते पर अगले दो हफ्तों में हस्ताक्षर हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में महाराष्ट्र सरकार को 1,601 करोड़ रुपये में इस इमारत की बिक्री की मंजूरी दी थी और राज्य मंत्रिमंडल ने नवंबर 2025 में इस खरीद को मंजूरी दी थी।
समझौता होने के बाद क्या कदम उठाएगी सरकार?
समझौते पर हस्ताक्षर और संपत्ति स्थानांतरित होने के बाद सरकार समुद्र किनारे स्थित इस 23 मंजिला इमारत का आंतरिक नवीनीकरण करेगी। इसे एक साल के भीतर चालू करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य है कि मंत्रालय के पास नरीमन प्वाइंट में स्थित इस इमारत में कई सरकारी दफ्तरों को स्थानांतरित किया जाए, जो अभी किराए की जगहों पर चल रहे हैं।
मंत्रालय और उसके उसके अतिरिक्त भवनों में जगह की कमी
मंत्रालय और उसके उसके अतिरिक्त भवनों में जगह की कमी के कारण यह कदम उठाया जा रहा है। 2012 में सचिवालय परिसर में आग लगने के बाद कई विभाग शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थानांतरित किए गए थे, जिससे किराए के कार्यालयों पर लगातार खर्च बढ़ता रहा।
1974 में बनाई गई थी इमारत
अधिकारियों के अनुसार, इस इमारत से कार्यालय के लिए लगभग 46,470 वर्ग मीटर स्थान मिलेगा, जो मंत्रालय के बेहद पास होगा और प्रशासनिक कामकाज को आसान बनाएगा। यह इमारत 1974 में बनाई गई थी और इस इमारत का डिजाइन जॉन बर्जी ने किया था। यह शहर के वित्तीय क्षेत्र में एक प्रमुख जगह मानी जाती है।
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एअर इंडिया ने की थी लगभग 2,000 करोड़ रुपये की मांग
एअर इंडिया ने 2018 में अपना मुख्यालय दिल्ली स्थानांतरित करने के बाद इस संपत्ति की बिक्री का फैसला किया था। शुरुआत में कंपनी ने लगभग 2,000 करोड़ रुपये की मांग की थी, जबकि महाराष्ट्र सरकार ने 1,400 करोड़ रुपये की पेशकश की थी। इस प्रक्रिया में जेएनपीए और एलआईसी जैसे अन्य बोलीदाता भी शामिल थे। लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका।
शिंदे सरकार में फिर शुरू हुई बातचीत
बाद में एकनाथ शिंदे सरकार के आने के बाद बातचीत फिर शुरू हुई और राज्य सरकार ने अपनी पेशकश बढ़ाकर 1,601 करोड़ रुपये कर दी तथा लीज से जुड़े लगभग 300 करोड़ रुपये के बकाया को भी माफ कर दिया। 2022 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तत्कालीन विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात कर इस बिक्री प्रक्रिया में राज्य सरकार को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया था।