महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने शिवसेना के पार्टी सचिव और मुंबई के प्रभादेवी स्थित सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आदेश बांदेकर को राज्यमंत्री का दर्जा देने की घोषणा की है। महाराष्ट्र सरकार ने संबंध में एक शासनादेश भी जारी किया है। बता दें कि ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि किसी पार्टी के सचिव को सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया हो।
महाराष्ट्र कैबिनेट में राज्यमंत्री का दर्जा पाने के बाद आदेश बांदेकर ने बयान दिया है। उन्होंने कहा, "मैं कोई भत्ता नहीं लूंगा, मैं सिर्फ लोगों की सेवा करना चाहता हूं। राज्यमंत्री का दर्जा किसी व्यक्ति को नहीं दिया गया है। यह एक पद (श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर के अध्यक्ष) को दिया गया है, जिस पर अभी मैं हूं।"
माना जा रहा है कि शिवसेना और भाजपा के बीच चल रही आंतरिक कलह को खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है। बताते चलें कि शिवसेना का रूख अपनी ही एनडीए सरकार के प्रति लगातार हमलावर रहा है। वह केंद्र की मोदी सरकार पर एक के बाद एक आरोप लगाती रही है।
बांदेकर ने अपने करियर की शुरुआत अभिनय के क्षेत्र से की थी। हालांकि कुछ सालों बाद वह शिवसेना में शामिल हो गए। वह मौजूदा समय में शिवसेना में सचिव पद पर सक्रिय नेता हैं। शिवसेना ने बांदेकर को दादर से चुनाव मैदान में भी उतारा था, हालांकि वह चुनाव हार गए। उन्हें 2017 में सिद्धिविनायक ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया।
उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी मुंबई में शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मुलाकात की था। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मुलाकात के दौरान ही बांदेकर को राज्यमंत्री का दर्जा देने के फैसले पर मुहर लगी। वहीं, मुलाकात के बाद शिवसेना ने भाजपा से महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर अपना रुख साफ किया था। शिवसेना ने कहा था कि वह महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों में से 152 सीटों पर लड़ना चाहती है और बाकी बची 136 सीट अपनी सहयोगी पार्टियों जिसमें बीजेपी मुख्य पार्टी है के लिए छोड़ देना चाहती है। यही नहीं सीटों पर कब्जे के साथ ही शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद पर भी अपना दावा ठोंका था।
Shiv Sena Party Secretary and Chairman of Mumbai's Siddhivinayak temple Trust Adesh Bandekar given minister of state rank by Maharashtra government.
— ANI (@ANI)
June 19, 2018