महाराष्ट्र कैबिनेट ने बुधवार को उन किसानों को मुआवजा देने का फैसला किया है, जिनकी पिछले महीने बारिश के कारण फसल बर्बाद हो गई थी। सरकार पीड़ित किसानों को तीन हेक्टेयर तक का मुआवजा देगी। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्ष में साप्ताहिक कैबिनेट बैठक हुई, जिसमें यह फैसला लिया गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने एक बयान में कहा, "अक्तूबर की बारिश में फसल के नुकसान के लिए तीन हेक्टेयर तक मुआवजा दिया जाएगा, जो राज्य आपदा राहत कोष के जरिए दी गई राशि का दोगुना है।"
बयान में कहा गया है, "किसानों को हुए नुकसान का जल्द से जल्द पंचनामा या आकलन किया जाएगा। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश ने 25 लाख हेक्टेयर सिंचित भूमि पर फसलों को नष्ट कर दिया।"
राज्य सरकार ने कहा कि लगातार बारिश के कारण हुए नुकसान के लिए किसानों को पूर्व मेंम कभी राहत नहीं दी गई थी। सरकार ने जून-जुलाई से 4,700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राहत उन किसानों को मुआवजे के रूप में प्रदान की है, जिनकी फसल को बारिश के कारण नुकसान हुआ था।
बयान में कहा गया, "जून-जुलाई से 40,15,847 किसानों को फसल का नुकसान हुआ है, जिन्हें 4,700 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं, जो राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष से ज्यादा है।" विपक्ष मांग कर रहा है कि सरकार राज्य में सूखा घोषित करे, लेकिन सरकार ने अब तक इस मांग को स्वीकार नहीं किया है।
अमृता ने ट्रैफिक क्लीयरेंस पायलट व्हीकल की सेवा लेने से किया इनकार
उधर, राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता ने आज ट्रैफिक क्लीयरेंस पायलट व्हीकल की सेवा लेने से इनकार कर दिया। अमृता ने कहा कि वह एक आम नागरिक की तरह जीना चाहती हैं। बता दें कि अमृता की सुरक्षा को अपग्रेड किया गया है। उन्हें वाई कैटगरी की सुरक्षा मुहैया कराई गई है। इसी के तहत उन्हें ट्रैफिक क्लीयरेंस पायलट व्हीकल की सेवा दी जानी थी।
हालांकि, पेशे से बैंकर अमृता फडणवीस ने कहा, मुंबई में ट्रांसपोर्ट की स्थिति निराशाजनक है, लेकिन एकनाथ शिंदे-भाजपा सरकार द्वारा चल रही बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं को पूरा करने के बाद चीजे बेहतर होने की संभावना है।
अमृता ने ट्वीट कर कहा, मैं मुंबई में एक आम नागरिक तरह रहना चाहती हूं। मैं नम्रतापूर्वक मुंबई पुलिस से अनुरोध करती हूं कि मुझे ट्रैफिक क्लीयरेंस पायलट व्हीकल न दें। मुंबई में ट्रैफिक की स्थिति निराशाजनक है, लेकिन मुझे यकीन है कि बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं के साथ हमें जल्द ही राहत मिलेगी।