मुंबई की सड़कें सोमवार को किसानमय दिखीं। महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से करीब 35000 से अधिक किसान मुंबई पहुंच गए हैं। किसी भी हालत में लोन माफी की मांग के साथ फॉरेस्ट राइट एक्ट के साथ साथ कृषि न्यूनतम मूल्य निर्धारण जैसी विभिन्न मांगों के साथ मुंबई पहुंचे किसान आज विधानसभा का घेराव करेंगे।
किसान के इस आंदोलन को शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस समेत कई दल इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। इस आंदोलन में आदिवासी क्षेत्रों जैसे नासिक, थाणे और पालघर सहित महाराष्ट्र के कई हिस्सों के किसान इस भाग से रहे हैं।
किसानों की मांग है कि बीते साल सरकार ने कर्ज माफी का जो वादा किसानों से किया था उसे पूरी तरह से लागू किया जाए। किसानों का कहना है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए और गरीब और मझौले किसानों के कर्ज माफ किए जाएं।
इसके साथ ही किसान आदिवासी वनभूमि के आवंटन से जुड़ी समस्याओं के निपटारे की भी मांग कर रहे हैं ताकि आदिवासी किसानों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक मिल सके।
राज्य के आर्थिक सर्वे की बात करें तो बीते सालों में कृषि विकास दर कम हुई है। संविधान के अनुसार कृषि राज्य का मामला है। लेकिन इस दिशा में महत्वपूर्ण फैसले केंद्र सरकार करती है। न्यूनतम समर्थन मूल्य से लेकर आयात-निर्यात के फैसले भी केंद्र सरकार के ही होते हैं।
वहीं किसानों की मांग है कि उन्हें स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों के अनुसार यानी खेती में होने वाले खर्चे के साथ-साथ उसका पचास फीसदी और दाम समर्थन मूल्य के तौर पर मिलना चाहिए। ऐसा करने से किसानों की आय की स्थिति को सुधारा जा सकता है।