महाराष्ट्र में उद्योगों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी मे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। राज्य सरकार की ओर से दी गई 1200 करोड़ की बिजली सब्सिडी में से 65 फीसदी सब्सिडी 15 स्टील कारखाना मालिकों को मिली जबकि छोटे व मझोले कारखानों को इसका लाभ ही नहीं मिल सका।
महाराष्ट्र सरकार हर साल मराठावाड़ा, विदर्भ विभाग व अन्य पिछड़े जिलों की कारखाना उत्पादन इकाइयों को करीब 1200 करोड़ रुपये की बिजली सब्सिडी देती है। लेकिन, 2016 से इसका फायदा सिर्फ 15 दिग्गज कारखाना मालिक उठा रहे हैं। छोटे व मध्यम कारोबारियों को सरकार की सब्सिडी नहीं मिल पा रही है, जिससे वे पड़ोस के राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। करीब 35 उत्पादन इकाइयां बंद हो चुकी हैं।
कई कारखाना मालिकों ने खुद को दिवालिया घोषित कर कारोबार ही बंद कर दिया है। कारखाना बंद होने व पलायन से राज्य सरकार को अलग-अलग मदों में करीब 10,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है और करीब 11,400 लोग बेरोजगार हुए हैं। खास बात है कि साल 2020-2021 के लिए मंजूर 1200 करोड़ की सब्सिडी दिसंबर महीने में ही खत्म हो गई।
उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए फडणवीस ने शुरू की थी सब्सिडी
साल 2014 में महाराष्ट्र में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने क्षेत्र विदर्भ में उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए बिजली सब्सिडी देने का निर्णय लिया था। उस वक्त विदर्भ के साथ मराठावाड़ा और अन्य पिछड़े जिले को भी इसमें शामिल किया गया। सब्सिडी के तहत साढ़े चार रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जाती है जबकि राज्य के दूसरे जिलों में बिजली की दर साढ़े आठ रुपये प्रति यूनिट है। लेकिन दिग्गज कारखाना मालिकों ने बाबुओं से मिलकर ऐसा खेला किया कि इसका फायदा सिर्फ उन्हीं को मिल सके।
अब होगी इसकी समीक्षा
विदर्भ, मराठावाड़ा संभाग के अलावा पिछड़े क्षेत्रों को दी जाने वाली बिजली की छूट में गड़बड़ी के बारे में वित्त विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि चंद दिन पहले ही इसकी जानकारी राज्य के वित्तमंत्री अजित पवार को दी गई है। वे बहुत नाराज हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर सब्सिडी का फायदा महज 15 लोगों को ही कैसे मिल रहा है? इस बारे में पवार ने पूरी जानकारी मांगी है। इस संबंध में जल्द ही समीक्षा बैठक होनी है।
सीएम, डिप्टी सीएम को लिखा पत्र
‘विदर्भ, मराठवाडा और अन्य पिछड़े जिलों में बिजली सब्सिडी का फायदा सिर्फ 15 दिग्गज उद्योगपति उठा रहे हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिखा है।
-एडवोकेट विनोद सिंह (शिकायतकर्ता)