महाराष्ट्र के जालना जिले की घनसांवगी विधानसभा का छोटा सा गांव। गांव में एक कच्चे रास्ते पर बने दो मंजिला घर के बाहर गाड़ियों का काफिला खड़ा है और काफी संख्या में लोग इस इंतजार में हैं कि सरपंच बाहर निकलें और मुलाकात हो। मराठा आरक्षण आंदोलन का पिछले कुछ समय से नेतृत्व कर रहे मनोज जरांगे पाटिल युवाओं में बेहद लोकप्रिय हैं। युवा उनकी झलक पाने के लिए बेताब हैं। शाम को करीब पांच बजे हाथ में ड्रिप लगाए हुए जरांगे ने लोगों से मिलना शुरू किया। इसी दौरान नितिन यादव ने उनसे बात की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश...
मराठा एक बड़ा वर्ग रहा है। रजवाड़े रहे हैं और संपन्नता भी रही है, तो फिर आरक्षण क्यों मांगा जा रहा है?
अब राजशाही नहीं बची है। अब संविधान का राज है। जब रजवाड़े थे, तो रहे होंगे, लेकिन अब लोग परेशानी में हैं और गरीब हैं। ऐसे में उनकी मदद करने में किसी को क्या दिक्कत है। राज तो यहां पर कई जगहों यादव राजाओं का भी रहा, लेकिन उन्हें आरक्षण दिया गया। हम किसी के खिलाफ नहीं है, बस अपने लोगों का हक मांग रहे हैं। आरक्षण की राजाओं को जरूरत नहीं है, आम लोगों को है।
आपके आंदोलन के बाद ओबीसी वर्ग के लोगों ने भी विरोध में आंदोलन शुरू कर दिया? उन्हें लगता है कि उनके हिस्से का आरक्षण चला जाएगा।
ओबीसी के आम लोग हमारे खिलाफ नहीं हैं। नेता ही विरोध कर रहे हैं। आम जनता चाहती है कि उसके जैसे सभी को लाभ मिलें। सब भाई-भाई हैं, विरोध जैसा कुछ नहीं है। मराठों को तो पहले भी आरक्षण मिल चुका है।