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महाराष्ट्र: सूखे से चारे की कमी, सरकारी योजनाओं के लिए जिला फंड का हिस्सा तय, कलेक्टरों को क्या निर्देश मिला?

Sat, 31 Oct 2026 11:39 AM IST
अमन मौर्या पीटीआई, मुंबई, महाराष्ट्र

सार

महाराष्ट्र सरकार ने सूखे के कारण चारे की कमी से निपटने के लिए जिला वार्षिक योजना फंड का पांच प्रतिशत हिस्सा चारे की योजनाओं हेतु तय किया है। साथ ही, पड़ोसी राज्यों में चारे की आपूर्ति सीमित कर 'चारा बैंक' बनाने के निर्देश दिए हैं।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सूखे के कारण चारे की कमी से निपटने के लिए, महाराष्ट्र सरकार ने जिला वार्षिक योजना फंड का पांच प्रतिशत हिस्सा चारे से जुड़ी योजनाओं के लिए तय किया है। साथ ही, चारे के अन्य उपयोगों पर रोक लगा दी गई है और पड़ोसी राज्यों में इसकी आपूर्ति को सीमित कर दिया गया है। शुक्रवार को पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य पालन विभाग द्वारा जारी एक सरकारी आदेश (जीआर) में जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे 'चारा बैंक' बनाएं, सूखे चारे की कीमतों की अधिकतम सीमा तय करें और पशु शिविरों में बायोमेट्रिक ट्रैकिंग लागू करें।
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ये कदम उस अध्ययन समूह की सिफारिशों के आधार पर उठाए गए हैं, जिसका गठन अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) की अध्यक्षता में किया गया था। इस समूह का काम कम बारिश के कारण पैदा हुई चारे की कमी से निपटने के उपाय सुझाना था। सूखा प्रबंधन पर बनी कैबिनेट उप-समिति ने अपनी हालिया बैठक में इस समूह की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। बता दें कि राज्य सरकार ने 304 तहसीलों में सूखा घोषित किया है, जहां 2026 के खरीफ सीजन के दौरान 'ट्रिगर-1' और 'ट्रिगर-2' की स्थिति सक्रिय हो गई थी। 'अल नीनो' के प्रभाव की संभावना को देखते हुए, जल संरक्षण के प्रयासों में तालमेल बिठाने के लिए सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य-स्तरीय टास्क फोर्स का भी गठन किया था।
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क्या है सरकारी आदेश?
सरकारी आदेश के अनुसार, जिला कलेक्टर अपने जिले की वार्षिक योजना के फंड का कम से कम पांच प्रतिशत हिस्सा (प्रभारी मंत्रियों की मंजूरी से) चारे से जुड़ी योजनाओं के लिए उपलब्ध कराएंगे। इन योजनाओं का उद्देश्य चारे का उत्पादन बढ़ाना, मौजूदा चारे को संरक्षित और बेहतर बनाना तथा चारे के वैकल्पिक स्रोत विकसित करना है। कृषि विभाग रबी सीजन के लिए चारे के बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। साथ ही, किसानों और पशुपालकों को ऐसी फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिनमें कम पानी की जरूरत होती है और जिनकी एक से अधिक बार कटाई की जा सकती है। सरकार ने चारे की खेती के लिए कृषि विश्वविद्यालयों की जमीन, बीज गुणन केंद्रों, कृषि निगम की भूमि और पशुपालन विभाग के अधीन आने वाले खेतों का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा है। सरकारी आदेश में कहा गया है कि वन भूमि पर मौजूद चारे और घास की कटाई की जाएगी और उसे स्टोर करके रखा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर पशुपालकों को बांटा जा सके।
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जिला कलेक्टर को क्या जिम्मेदारी मिली?
जिला कलेक्टर चारे की खेती के लिए कृषि भूमि के उपयोग में मदद करेंगे। साथ ही, वे 'किसान उत्पादक संगठनों' (एफपीओज), 'किसान उत्पादक कंपनियों' और स्वयंसेवी समूहों के साथ मिलकर 'चारा बैंक' स्थापित करने का काम करेंगे। जीआर (सरकारी आदेश) में सूखे चारे के लिए 12 रुपये प्रति किलोग्राम और साइलेज के लिए 8 रुपये प्रति किलोग्राम तक की अधिकतम कीमत तय की गई है, जिसमें परिवहन का खर्च शामिल नहीं है। चारे की खरीद इसी सीमा के भीतर की जाएगी और सूखे चारे को प्राथमिकता दी जाएगी क्योंकि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
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