महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का समर्थन किया है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि पूर्व राज्यपाल कोश्यारी ने एमएलसी नामांकन को लेकर एमवीए नेताओं की धमकी भरे लहजे में लिखे पत्र के बारे में मुझे भी जानकारी दी थी। डिप्टी सीएम फडणवीस की यह टिप्पणी तब आई है जब एक दिन पहले ही पूर्व राज्यपाल कोश्यारी ने राज्यपाल के कोटे के तहत विधान परिषद के 12 सदस्यों के नामांकन पर अपने रुख का बचाव किया था। सोमवार को एक साक्षात्कार के दौरान कोश्यारी ने कहा था कि एमएलसी नामांकन को लेकर एमवीए नेताओं ने उन्हें धमकाने की कोशिश की थी।
क्या बोले फडणवीस?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को पुणे में कहा, 'मेरी जानकारी के अनुसार, महाविकास अघाड़ी के नेताओं ने राजभवन का दौरा किया था और (तत्कालीन) राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की थी। जिसके बाद राज्यपाल ने मुझे बताया था कि एमवीए नेताओं ने धमकी भरे लहजे में उन्हें एक पत्र लिखा था। यहां तक कि जब उन्हें एक नया पत्र फिर से लिखने के बारे में कहा गया तो अहंकार के कारण एमवीए नेताओं ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।'
गौरतलब है कि एमएलसी नामांकन तत्कालीन एमवीए सरकार और कोश्यारी के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा था। दरअसल, महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने साल 2020 में तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को विधान परिषद में नामांकन के लिए 12 लोगों की एक लिस्ट सौंपी थी। हांलाकि, उस समय राज्यपाल रहे कोश्यारी ने उस लिस्ट में शामिल लोगों के नामांकन न तो खारिज किए और न ही स्वीकार किया। राज्यपाल कोश्यारी के इस रुख को लेकर एमवीए के नेताओं ने कोश्यारी पर भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था। गौरतलब है कि भाजपा उस समय विपक्ष में थी।
लिस्ट में किन नेताओं का था नाम
जिन 12 नामों को लेकर तत्कालीन राज्यपाल और एमवीए के बीच विवाद हुआ था, उनमें शिवसेना नेता एवं एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर, विजय शंकर, नितिन बांगुडे-पाटिल और चंद्रकांत रघुवंशी के नाम शामिल थे। इनके अलावा किसान नेता राजू शेट्टी, पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे, यशपाल भिंगे, एनसीपी नेता और लोक गायक आनंद शिंदे, कांग्रेस के रजनी पाटिल, सचिन सावंत, अनिरुद्ध वंकर और मुजफ्फर हुसैन के नाम भी सूची में थे।