मुंबई के गोरेगांव स्थित आरे कॉलोनी में स्थानीय प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक कार्रवाई एक अनाधिकृत दरगाह के खिलाफ की गई है। प्रशासनिक आदेश के बाद बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को गिरा दिया गया। मौके से आई वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि अवैध निर्णाण को गिराने और मलबा हटाने का अभियान जारी है।
भाजपा नेता किरीट सोमैया क्या बोले?
भारतीय जनता पार्टी के नेता किरीट सोमैया ने मंगलवार को मुंबई पुलिस और नागरिक अधिकारियों को पत्र लिखा। उन्होंने शहर की सार्वजनिक सड़कों पर नमाज अदा करने पर रोक लगाने का आग्रह किया। सोमैया ने दावा किया कि इससे यातायात बाधित होता है और यात्रियों को असुविधा होती है।
मुंबई की सड़कों पर नमाज रोकने की मांग
अपने पत्र में सोमैया ने कहा, 'सड़क पर नमाज अदा करना बंद करें। ये मुंबई जैसे शहर में 'गंभीर समस्या' है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोग रेलवे स्टेशनों और प्रमुख परिवहन जंक्शनों के बाहर नमाज के लिए इकट्ठा होते हैं। इससे भीड़भाड़ होती है और दैनिक यात्रियों को परेशानी होती है। सोमैया ने यह भी कहा कि कार्यदिवसों पर ऐसी गतिविधियां नागरिकों की दिनचर्या में बाधा डालती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी प्रथाओं की अनुमति देने से सार्वजनिक सड़कों पर इसी तरह के जमावड़े के लिए एक मिसाल कायम हो सकती है। सोमैया ने अपने पत्र में कुछ तत्वों के लिए कड़ी भाषा का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने मुंबई पुलिस आयुक्त और अन्य अधिकारियों से सड़कों पर नमाज तुरंत रोकने का आग्रह किया।
टीएमसी नेता की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के नेता मजीद मेमन ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सड़कों पर नमाज की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि इससे दूसरों को असुविधा होती है। मेमन ने यह भी कहा कि यह मुद्दा प्रशासनिक प्रकृति का है। उन्होंने बताया कि मस्जिदों में जगह की कमी और नई मस्जिदों के निर्माण की अनुमति न मिलना भी एक कारण है। मेमन के अनुसार, नमाज आमतौर पर मस्जिदों के अंदर दिन में पांच बार अदा की जाती है।
संवाद से समाधान पर जोर
मेमन ने कहा कि इस मामले को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है। उन्होंने सोमैया पर तंज कसते हुए पूछा, 'मैं किरीट सोमैया से पूछना चाहता हूं - क्या वह चाहते हैं कि मुसलमान नमाज अदा करें या नहीं?' मेमन ने कहा कि ऐसे लोगों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे मुस्लिम समुदाय और प्रशासन के बीच का मामला बताया।