अदालत ने कहा, 'यह हैरान करने वाला है कि खुशी-खुशी साथ में नाश्ता करने और कमरे में आने के बाद, अचानक ऐसा क्या हुआ कि आरोपी ने पीड़िता पर हमला कर दिया, यह बात साबित नहीं होती।
ठाणे की एक अदालत ने साल 2022 में एक व्यक्ति की हत्या की कोशिश के मामले में एक ऑटो-रिक्शा चालक को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष हमले से जुड़ी घटनाओं को साबित करने में विफल रहा, जिससे घटना की उत्पत्ति सवालों के घेरे में आ गई। ठाणे के मुख्य जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस.बी. अग्रवाल ने एफआईआर और अदालत में पीड़ित की गवाही के बीच कई खामियां हैं।
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अभियोजन पक्ष ने लगाए ये आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी जगदीश उर्फ यागदेव भीखो महतो (54 वर्षीय) ने 3 नवंबर, 2022 को महाराष्ट्र के ठाणे शहर के कोपरी इलाके में जब्बार अब्दुल रहमान मालगुडकर के सिर और हाथ पर धारदार हथियार से कथित तौर पर हमला किया। इसके बाद, आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास और अवैध हथियार रखने सहित विभिन्न आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई। आरोपी और पीड़ित एक दूसरे के परिचित थे। पीड़ित ने गवाही दी कि दोनों साथ में नाश्ता करने बाहर गए थे। जब पीड़ित आरोपी के घर बिस्तर पर लेटा अपने मोबाइल फोन पर क्रिकेट मैच देख रहा था, तभी आरोपी अचानक रसोई में गया, वापस आया और उस पर हमला कर दिया।
अदालत ने उठाए सवाल
जस्टिस अग्रवाल ने पाया कि प्राथमिकी में एक पूर्व विवाद का उल्लेख था, जिसमें दावा किया गया था कि आरोपी इसलिए नाराज था क्योंकि पीड़ित ने उसे सोने की चेन और 10,000 रुपये देने से इनकार कर दिया था, लेकिन ये विवरण पीड़ित ने अदालत में गवाही के दौरान छिपाए थे। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश घटनाओं के क्रम को भी अविश्वसनीय पाया। अदालत ने कहा, 'यह हैरान करने वाला है कि खुशी-खुशी साथ में नाश्ता करने और कमरे में आने के बाद, अचानक ऐसा क्या हुआ कि आरोपी ने पीड़िता पर हमला कर दिया, यह बात साबित नहीं होती। इससे घटना की उत्पत्ति पर संदेह पैदा होता है।' अदालत ने कहा कि सबूत भी पीड़ित के बयान से मेल नहीं खाते, और मेडिकल सर्टिफिकेट में तीन साधारण चोटों का संकेत मिलने से मामला और भी कमजोर हो गया, जिससे हत्या के प्रयास का आरोप और भी जटिल हो गया।