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राहुल ने दिया था राजनीति में पहला ब्रेक, उन्हीं के विरोध में उतरे शहजाद पूनावाला

Thu, 30 Nov 2017 02:36 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
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शहजाद पूनावाला
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने से पहले ही पार्टी के भीतर धीरे-धीरे ही सही लेकिन विरोध के स्वर उठने लगे हैं। इस विवाद को हवा दी है पार्टी के युवा नेता और महाराष्ट्र कांग्रेस के सचिव शहजाद पूनावाला ने। उन्होंने कहा है कि अध्यक्ष पद के लिए हो रहा चुनाव महज एक दिखावा है। उन्होंने ये भी कहा कि यह इलेक्शन नहीं सिलेक्शन है। यही नहीं पूनावाला ने पार्टी में वंशवाद के मामले को उठाते हुए कहा है कि यह गलत है।
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शहजाद पूनावाला के बयान के बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा कि शहजाद के पार्टी के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं हैं।  यहां तक कि वो कांग्रेस में भी नहीं है।  पिछले  ढ़ाई सालों से उसका पार्टी से भी कोई लेना-देना नहीं है। शहजाद जो भी कर रहे हैं महज पब्लिसिटी के लिए कर रहे हैं। 


There is no truth in his allegations, moreover he is not a Congressman, for last 2  1/2 years he hardly had any involvement in the party issues. Doing it for publicity: Ashok Chavan,Maharashtra Congress Chief on #ShehzadPoonawalla pic.twitter.com/Bm3ecUG6bT— ANI (@ANI) November 30, 2017
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आइए, जानते हैं कि आखिर कौन हैं शहजाद पूनावाला

30 साल के शहजाद पूनावाला जब 15 साल के थे तब उन्होंने ठान लिया था कि वो राजनीति में अपना करियर बनाएंगे। पुणे के एमआईटी स्कूल ऑफ गर्वनमेंट और इंडियन लॉ स्कूल से पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने एनएसयूआई ज्वाइन किया और पुणे कांग्रेस यूथ विंग के वाइस प्रेसिडेंट बनाए गए। 

शहजाद एक राजनीतिज्ञ के साथ ही वकील और सिविल राइट एक्टिविस्ट भी हैं। फिलहाल वो दिल्ली में कई वर्षों से वकालत कर रहे हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बेहतरीन लीडरशिप क्वालिटी वाले NSUI के युवा छात्र नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर मंच देने के लिए 2008 में एक भर्ती अभियान चलाया था। जिसमें उन्होंने उनलोगों को चुना था, जिनमें राजनीति की समझ और लीडरशिप क्वालिटी हो। चार लाख लोगों में उन्होंने कई युवा नेताओं को मौका दिया जिनमें से एक शहजाद पूनावाला भी हैं।

पढ़ें: अध्यक्ष पद के चुनाव को कांग्रेस नेता ने कहा 'दिखावा', बोले- राहुल की जीत फिक्स

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वो राहुल ही थे जिन्होंने उनकी काबिलियत को देखा और राजनीति में पहला मौका संसदीय कार्य मंत्रालय में अतिरिक्त निजी सचिव के रूप में दिया था। शहजाद जब 23 साल के हुए तो ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी में मीडिया सेल की रिसर्च टीम के सदस्य बना दिए गए जबकि NSUI पुणे विंग के वाइस प्रेसिडेंट भी रहे। कई मौकों पर उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में कांग्रेस का पक्ष भी रखा था।
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