महाराष्ट्र में हो रहे ग्राम पंचायत चुनाव में शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी की महाविकास आघाड़ी में बिखराव हो गया है, जिससे तीनों दल आमने-सामने आ गए हैं। इससे मिनी विधानसभा चुनाव कहे जाने वाले ग्राम पंचायत चुनाव में मुख्य विपक्षी दल भाजपा को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद दिखाई देने लगी है। लेकिन सत्ताधारी दलों के नेता भी अपने तरीके से रणनीति बनाकर अधिकतम ग्राम पंचायतों में अपनी जीत सुनिश्चित करना चाहते हैं।
राज्य चुनाव आयोग ने सूबे में 14 हजार 234 ग्राम पंचायतों के चुनाव की घोषणा की है। आगामी 15 जनवरी को पंचायत चुनावों के लिए मतदान होगा। जबकि 18 जनवरी को मतगणना की जाएगी। हालांकि ये चुनाव 31 मार्च 2020 से पहले सम्पन्न कराए जाने थे, लेकिन कोरोना महामारी के चलते चुनाव नहीं कराया जा सका था। इन ग्राम पंचायतों में सरकार ने प्रशासक नियुक्त करने का फैसला किया था।
भाजपा ने शिकायत की थी कि पैसे लेकर कार्यकर्ताओं को ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किया जा रहा है। वहीं, समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी प्रशासक नियुक्त करने के खिलाफ आंदोलन की धमकी दी थी। यह नियुक्ति विवादों में आने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। तब कोर्ट ने सरकारी कर्मचारी को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश दिया था।