पाकिस्तान से पांच साल पहले भारत वापस लौटी मूक-बधिर महिला गीता तेलंगाना में अपने परिवार की खोज कर रही है। गीता ने अपने परिवार को ढूंढने की कोशिश में अपने केयरटेकर्स के साथ तेलंगाना के बसर कस्बे की यात्रा की। वह अपने उस परिवार को ढूंढ रही है जिससे वह बचपन में बिछुड़ गई थी।
हालांकि, परिवार को खोजने के अपने इस अभियान में उसे निराशा ही हाथ लगी है। क्योंकि, तेलंगाना-महाराष्ट्र सीमा पर स्थित करीब 200 किलोमीटर दूर इस कस्बे के किसी भी हिस्से से उसका संपर्क नहीं हो पाया है। मध्यप्रदेश के इंदौर में स्थित एनजीओ आनंद सर्विस सोसायटी गीता की देखभाल कर रहा है।
एनजीओ के एक अधिकारी ने पिछले महीने कहा था कि भारत वापस लौटने के बाद गीता के परिवार को ढूंढने के सभी प्रयास नाकाम साबित हुए हैं और हम इसके लिए नए सिरे से कोशिशों की शुरुआत करेंगे। एनजीओ का कहना है कि गीता को उसके परिवार से मिलाने की पूरी कोशिश की जा रही है।
सोसायटी के निदेशक ज्ञानेंद्र पुरोहित ने उस समय कहा था कि गीता के साथ संपर्क के दौरान उन्हें उसके भौगोलिक पृष्ठभूमि को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिले थे, जो बताते हैं कि उसका परिवार महाराष्ट्र और तेलंगाना में नांदेड़ के आस-पास हो सकता है। पुरोहित सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज) के विशेषज्ञ हैं।
अब करीब 30 साल की हो चुकी गीता और एनजीओ के आयोजकों ने मंगलवार को तेलंगाना के निर्मल जिले में बसर का दौरा किया। बसर में देवी सरस्वती का एक प्रसिद्ध मंदिर है और गोदावरी नदी यहां से बहती है। उन्होंने अपनी यात्रा के लिए पुलिस और एक राजस्व अधिकारी से भी संपर्क किया था।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि गीता की ओर से मिले संकेतों में एक नदी, मंदिर, रेलवे स्टेशन, धान की खेती और लोगों की इडली खाने की आदत शामिल है। इससे अनुमान लगाया गया कि यह स्थान तेलंगाना या आंध्र प्रदेश में हो सकता है और इसीलिए उसे बसर लाया गया था, कि कुछ पुख्ता जानकारी मिल सके।