महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में इस बार भले ही बड़े दिग्गज नेताओं की टक्कर रही हो, लेकिन कई अनोखी और चौंकाने वाली जीतों ने पूरे राज्य और देश का ध्यान खींच लिया है। कहीं एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जीत चर्चा में रही, तो कहीं गंभीर आपराधिक मामले में आरोपी उम्मीदवार की जेल से जीत ने नई बहस छेड़ दी है। बीएमसी समेत कई नगरपालिकाओं में मतगणना से जुड़ी
जलगांव में एक परिवार का राजनीतिक रिकॉर्ड
जलगांव नगर निगम चुनाव में कोल्हे परिवार ने इतिहास रच दिया। परिवार के तीन सदस्यों ने अलग-अलग वार्डों से जीत दर्ज की।शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और पूर्व महापौर ललित कोल्हे ने जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वहीं उनके बेटे पीयूष कोल्हे ने अपने राजनीतिक करियर का पहला चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया।
जैसे ही जीत की खबर सामने आई, ललित कोल्हे की पत्नी और शिंदे सेना की महिला विंग की प्रमुख सरिता कोल्हे भावुक हो गईं और खुशी के आंसू बहाते हुए बेटे को गले लगा लिया। यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुआ।
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गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी की जालना में जीत
जालना नगर निगम चुनाव में पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी श्रीकांत पंगारकर ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में वार्ड नंबर 13 से जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा समेत अन्य दलों के उम्मीदवारों को 2,621 वोटों के अंतर से हराया। खास बात यह रही कि इस वार्ड से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा, जिससे मुकाबला बहुकोणीय हो गया।
श्रीकांत पंगारकर के खिलाफ मामला अभी अदालत में लंबित है। जीत के बाद उन्होंने कहा कि अब तक उनके खिलाफ कोई सजा नहीं हुई है और कानूनी प्रक्रिया जारी है। उनकी जीत के बाद समर्थकों के साथ जश्न मनाते हुए वीडियो सामने आए, जिसने आरोपित व्यक्तियों के चुनाव लड़ने को लेकर देशभर में नई बहस को जन्म दे दिया है।
अरुण गवली को दोहरा झटका, दोनों बेटियां और भाभी हारीं
पूर्व गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली को बीएमसी चुनाव में बड़ा झटका लगा है। दक्षिण मुंबई के अलग-अलग वार्डों से चुनाव लड़ रहीं उनकी दोनों बेटियां हार गईं। गवली की बेटी गीता गवली, जो बायकुला-आगापाड़ा इलाके से चौथी बार चुनाव जीतने की कोशिश में थीं, उन्हें समाजवादी पार्टी की अमरीन शेज़ाद अब्रहानी ने हरा दिया। वहीं, पहली बार चुनाव मैदान में उतरी दूसरी बेटी योगिता गवली को बायकुला-चिंचपोकली इलाके में भाजपा उम्मीदवार रोहिदास लोखंडे से हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा गवली की भाभी वंदना प्रदीप गवली, जो शिवसेना (शिंदे गुट) के टिकट पर वार्ड 198 से चुनाव लड़ रही थीं, उन्हें शिवसेना (UBT) की अबोली गोपाल खड़ये ने पराजित किया। इस चुनाव में अरुण गवली खुद भी पहली बार अपनी बेटियों के लिए प्रचार करते नजर आए और रोड शो किए, लेकिन इसके बावजूद परिवार को सफलता नहीं मिली।
बीएमसी नतीजों पर नितेश राणे का तंज, ठाकरे परिवार पर कसा कटाक्ष
महाराष्ट्र के बीएमसी चुनावों में महायुति की बहुमत से जीत के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच नितेश राणे ने एक वीडियो साझा कर उद्धव ठाकरे और ठाकरे परिवार पर तंज कसा। वीडियो में नितेश राणे हंसते हुए नजर आए और ठाकरे परिवार की हार को लेकर कटाक्ष करते दिखाई दिए।
नितेश राणे ने कहा कि मुंबई महानगरपालिका में महायुति की जीत यह साबित करती है कि जनता ने विकास और मजबूत गठबंधन को तरजीह दी है। उन्होंने इस जीत का श्रेय देवेंद्र फडणवीस की रणनीति और नेतृत्व को भी दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि बीजेपी और एकनाथ शिंदे के गठबंधन ने कड़ी मेहनत और सही रणनीति के दम पर चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है।