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Maharashtra Civic Polls: क्या उंगलियों से हटाई गई स्याही? वायरल वीडियो के बाद विवाद तेज; आयोग ने दिया ये जवाब

Thu, 15 Jan 2026 04:42 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में मतदान के दौरान उंगली पर लगने वाली स्याही विवादित हो गई है। मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि मार्कर पेन की स्याही आसानी से मिट रही है, जिससे फर्जी वोटिंग की संभावना बन रही है। ऐसे सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या यह चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है? हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की चुनाव आयोग जांच कर रहा है।

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महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) समेत महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों पर एक तरफ जहां मतदान जारी है। वहीं दूसरी ओर अब नगर निगम चुनावों के दौरान वोट डालने के बाद उंगली पर लगाई जा रही स्याही को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के मंत्री और शिंदे गुट के शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने गुरुवार को दावा किया कि यह स्याही आसानी से मिट रही है, जिससे फर्जी मतदान की आशंका पैदा हो सकती है।

संजय शिरसाट ने अपने परिवार के साथ वोट डालने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उंगली पर लगाई जा रही मार्कर पेन की स्याही आसानी से हटाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से कुछ जगहों पर दोबारा वोट डाले जाने की संभावना हो सकती है। उन्होंने मतदान अधिकारियों और पोलिंग एजेंटों से इस पर कड़ी नजर रखने की अपील की। बता दें कि गुरुवार को महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में चुनाव कराए जा रहे हैं।

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चुनाव आयोग की चेतावनी
इसी बीच महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि मतदाता की अंगुली पर लगाई गई इंडलेबल इंक को मिटाने या पोलिंग के दौरान भ्रम फैलाने का प्रयास करना चुनावी गड़बड़ी माना जाएगा। राज्य चुनाव आयोग ने मतदाताओं और सभी दलों को साफ-साफ चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करना गंभीर अपराध है और किसी भी परिस्थिति में दोबारा वोटिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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वायरल वीडियो की जांच में जुटा आयोग
इससे पहले राज्य के निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे ने कहा था कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उन वीडियो की जांच की जा रही है, जिनमें लोग वोट डालने के बाद अपनी उंगली से स्याही हटाते हुए दिखाई दे रहे हैं। बता दें कि सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि नेल पॉलिश रिमूवर, एसीटोन और पेंट थिनर जैसी चीजों से वोट की स्याही आसानी से हटाई जा सकती है।

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चुनाव आयोग ने दी सफाई
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने यह भी बताया कि चुनाव में इस्तेमाल की जा रही यह मार्कर स्याही ‘कोरेस’ कंपनी की है, जिसका इस्तेमाल साल 2011 से चुनावों में किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने कहा है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और अगर कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

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